क्या जीवन में हम अपने फैसले खुद लेते हैं या किस्मत ही सब तय करती है? शेखर कपूर का बड़ा सवाल

जीवन में फैसले हमारे होते हैं या फिर किस्मत का खेल? शेखर कपूर ने उठाया बड़ा सवाल


मुंबई, 15 फरवरी। कई बार इंसान सोचता कुछ है और होता कुछ और है। ऐसे ही अनुभवों पर हाल ही में मशहूर फिल्म निर्देशक शेखर कपूर ने खुलकर बात की। उन्होंने अपने जीवन के शुरुआती दौर को याद करते हुए सवाल उठाया कि क्या हमारे फैसले सच में हमारे अपने होते हैं या फिर सब कुछ किस्मत और कर्म के हिसाब से पहले से तय होता है।

शेखर कपूर ने बताया, ''मेरे जीवन की शुरुआत एक बिल्कुल अलग दिशा में हो रही थी। मैं चार्टर्ड अकाउंटेंसी की पढ़ाई के लिए लंदन गया था। उस समय यह करियर सबसे बेहतरीन माना जाता था। अच्छी पढ़ाई, पक्की नौकरी, समाज में इज्जत और आरामदायक भविष्य, सब कुछ जैसे तय था। मुझे लगता था कि पढ़ाई पूरी कर भारत लौटूंगा, अच्छी नौकरी करूंगा, परिवार बसाऊंगा और फिर जीवन सुकून से कटेगा। उस दौर में यह एक सेट जिंदगी मानी जाती थी, जिसमें जोखिम की कोई जगह नहीं थी।''

उन्होंने आगे कहा, ''लेकिन जिंदगी ने मेरे लिए कुछ और ही रास्ता चुना था। पढ़ाई पूरी करने और लंदन में कुछ नौकरियां करने के बाद मैंने अचानक सब कुछ छोड़ने का फैसला किया। मुझे खुद नहीं पता था कि आगे क्या करना है, फिर भी मैंने उस सुरक्षित रास्ते से हटने की हिम्मत जुटाई।''

शेखर कपूर ने अपने जीवन को लेकर एक बड़ा सवाल उठाया—'क्या यह सब कर्म का परिणाम था या मेरी अपनी पसंद?' उन्होंने कहा, "ऐसा नहीं है कि मैंने कुछ किया ही नहीं। मैंने भारत और विदेशों में अभिनय किया, फिल्में और टेलीविजन प्रोजेक्ट्स बनाए और थिएटर की दुनिया में भी काम किया। मैंने लंदन के वेस्ट एंड, ब्रॉडवे, यूरोप, और दुबई में नाट्य प्रस्तुतियां कीं। इसके अलावा, मैंने भारत का पहला डिजिटल स्टार्टअप भी शुरू किया और विदेशों में पढ़ाया। मैंने हर उस मौके को अपनाया, जो मेरे सामने आया।"

उन्होंने कहा, ''यह सब मैंने किसी तय योजना के तहत नहीं किया, बल्कि हालात और मौकों के अनुसार अपने कदम बढ़ाता चला गया। इंसान अपने जीवन की कई अहम चीजों पर कोई कंट्रोल नहीं रखता। हम यह तय नहीं करते कि हमारा जन्म कब होगा, हम किससे प्यार करेंगे, कब दिल टूटेगा या जिंदगी कब खत्म होगी।''

शेखर कपूर ने कहा कि शायद जीवन में कुछ चीजें हमारी समझ से बाहर होती हैं। इंसान कोशिश करता है, मेहनत करता है, लेकिन कई बार रास्ते अपने आप खुलते चले जाते हैं।
 

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