अमृता फडणवीस ने लॉन्च किया 'शंभू रे', बोलीं- यह गीत सुनते ही आपका मन शिव भक्ति से सराबोर हो जाएगा

अमृता फडणवीस ने जारी किया 'शंभू रे' गीत, कहा-सुनते ही मन में जागती है शिव भक्ति


मुंबई, 15 फरवरी। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर प्लेबैक सिंगर अमृता फडणवीस ने नया भक्ति गीत 'शंभू रे' रिलीज किया है। यह गीत भगवान शिव को समर्पित है। इसका उद्देश्य लोगों के अंदर श्रद्धा और आस्था को जागृत करना है। इसको लेकर अमृता फडणवीस ने कहा कि जब संगीत में सच्ची भक्ति होती है, तो वह सीधे दिल तक पहुंचता है और सुनने वाले को एक अलग ही शांति का अनुभव होता है।

अमृता फडणवीस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी हैं। आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने इस गीत के पीछे की सोच और अपनी भावनाओं को खुलकर साझा किया। उन्होंने कहा, ''किसी भी गीत की खूबसूरती उसमें छिपी भावना में होती है। अगर किसी इंसान के दिल में अपने भगवान के लिए सच्चा प्रेम और भक्ति है, तो वही भावना गीत को खास बना देती है। 'शंभू रे' भी ऐसा ही गीत है, जो भक्ति भावना को जाग्रत करता है और मन को शांति से भर देता है।''

संगीत के साथ अपने जुड़ाव को लेकर अमृता फडणवीस ने कहा, ''संगीत मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि जीवन का अहम हिस्सा है। संगीत मेरी आत्मा है। मेरे लिए यह सांस लेने जितना जरूरी है। चाहे देर रात हो या सुबह का वक्त, जब भी मुझे समय मिलता है, मैं शास्त्रीय संगीत का अभ्यास जरूर करती हूं। सुरों की साधना और नियमित रियाज मेरे जीवन की दिनचर्या का हिस्सा है।''

उन्होंने बताया, ''हर नया गीत मेरे लिए एक नई जिम्मेदारी की तरह होता है। जिस तरह एक बच्चे की परवरिश ध्यान और प्यार से की जाती है, उसी तरह हर गीत को भी पूरा समय और मेहनत देना जरूरी होता है। रिकॉर्डिंग से पहले मैं गीत की भावनाओं को समझती हूं, उस पर काम करती हूं और फिर उसे अंतिम रूप देती हूं, ताकि श्रोताओं तक सही भाव पहुंच सके।''

इस सफर में संगीतकार मोंटी शर्मा के सहयोग को अहम बताते हुए अमृता फडणवीस ने कहा, ''मोंटी शर्मा ने इस गीत में मेरा मार्गदर्शन किया। उनकी मदद से ही मैं इस रचना को सही रूप दे सकी। अच्छे सहयोग के बिना किसी भी कलाकार के लिए आगे बढ़ना आसान नहीं होता।''

जब आईएएनएस ने उनसे फिल्मों में अभिनय को लेकर सवाल किया, तो अमृता फडणवीस ने कहा, ''मैंने कभी अभिनय को अपना रास्ता नहीं माना। मुझे पहले भी अभिनय के कई प्रस्ताव मिले, लेकिन सभी को विनम्रता से मैंने मना कर दिया। संगीत ही मेरा असली जुनून और पहचान है। भावनाओं को व्यक्त करने का जो सुकून गायन में मिलता है, वह किसी और माध्यम में नहीं मिलता।''
 
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