क्या जानते हैं आप? 4.5 अरब साल पुराना हमारा सूरज, क्यों है 'कोरोना हीटिंग' का रहस्य विज्ञान के लिए पहेली

सन फैक्ट्स : 4.5 अरब साल पुराना सूर्य, आज तक अनसुलझा है 'कोरोना हीटिंग' का रहस्य!


नई दिल्ली, 15 फरवरी। सर्दियों का मौसम अब धीरे-धीरे विदाई ले रहा और गर्मियों का मौसम दस्तक देने को तैयार है। आने वाले दिनों में लू के थपेड़े, लगातार बढ़ता तापमान और आसमान से बरसती तपिश लोगों को फिर से परेशान करती नजर आएगी। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस सूर्य की गर्मी से हम बेहाल हो जाते हैं, वह आखिर है क्या?

करीब 4.5 अरब वर्ष पुराना सूर्य रहस्यों से भरा एक विशाल खगोलीय पिंड है। उसका तापमान, उसकी संरचना और उसकी ऊर्जा हर पहलू वैज्ञानिकों के लिए आज भी अध्ययन का विषय बना हुआ है। सूर्य एक ‘पीला बौना’ तारा है, जो मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम गैसों से बना हुआ एक अत्यंत गर्म और चमकीला गोला है। यही हमारे सौरमंडल का केंद्र है, जिसके चारों ओर पृथ्वी समेत सभी ग्रह परिक्रमा करते हैं।

पृथ्वी से सूर्य की औसत दूरी लगभग 93 मिलियन मील यानी 150 मिलियन किलोमीटर है। यह हमारे सौरमंडल का एकमात्र तारा है और यही पृथ्वी पर जीवन का आधार भी है। सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा के बिना न तो प्रकाश संभव है, न ही जीवन।

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के अनुसार, सूर्य को देखकर लगता है कि यह स्थिर है, लेकिन यह एक डायनैमिक तारा है जो लगातार बदलता रहता है और अंतरिक्ष में ऊर्जा भेजता रहता है। सूरज और सोलर सिस्टम पर उसके प्रभाव की स्टडी को हीलियोफिजिक्स कहते हैं। सूरज सोलर सिस्टम का सबसे बड़ा पिंड है, इसका व्यास करीब 865,000 मील यानी 1.4 मिलियन किलोमीटर है, यानी पृथ्वी से 109 गुना बड़ा। अगर सूर्य खोखला होता तो उसमें 13 लाख पृथ्वी समा सकती थीं। इसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति ग्रहों, क्षुद्रग्रहों और धूमकेतुओं को ऑर्बिट में बांधे रखती है।

हालांकि, पृथ्वी के लिए सूरज बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन ब्रह्मांड में यह एक साधारण तारा है। इससे 100 गुना बड़े तारे मिल चुके हैं और कई सिस्टम में दो या अधिक तारे होते हैं और इसकी स्टडी से वैज्ञानिक दूर के तारों को समझते हैं। सूरज का सबसे गर्म हिस्सा कोर है, जहां तापमान 27 मिलियन फारेनहाइट यानी 15 मिलियन डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होता है।

पृथ्वी से जो सतह दिखती है, उसे फोटोस्फीयर कहा जाता है, जिसका तापमान 10,000 डिग्री फारेनहाइट यानी 5,500 डिग्री सेल्सियस होता है। फोटोस्फीयर 'लाइट स्फीयर' है, जहां से ज्यादातर रोशनी निकलती है। लेकिन सूरज का सबसे बड़ा रहस्य कोरोना है। कोरोना सतह से जितना दूर जाता है, उतना गर्म होता जाता है, जिसका तापमान 3.5 मिलियन डिग्री फारेनहाइट या 2 मिलियन डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। 'कोरोना हीटिंग' का रहस्य आज भी अनसुलझा है।

सूरज का रेडियस 7 लाख किलोमीटर है, इसका सबसे करीबी पड़ोसी प्रॉक्सिमा सेंचुरी 4.24 प्रकाश वर्ष दूर है। सूरज मिल्की वे गैलेक्सी के ओरियन स्पर आर्म में है। यह 4 लाख 50 हजार मील प्रति घंटे की रफ्तार से गैलेक्सी के केंद्र का चक्कर 230 मिलियन साल में पूरा करता है। सूरज अपनी धुरी पर अर्थ डे के अनुसार 25 दिन में एक चक्कर, ध्रुवों पर 36 दिन में घूमता है। इसका स्पिन 7.25 डिग्री झुका है। खास बात है कि सूरज ठोस नहीं है, इसलिए अलग-अलग हिस्से अलग रफ्तार से घूमते हैं।

सूरज हर 11 साल में सोलर साइकिल से गुजरता है। सोलर एक्टिविटी से अंतरिक्ष का वातावरण प्रभावित होता है। इससे सैटेलाइट, जीपीएस, पावर ग्रिड पर असर पड़ता है। एनओएए स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर अलर्ट जारी करता है। सूर्य पृथ्वी पर जीवन का आधार है, उसकी रोशनी से पृथ्वी गर्म रहती है और उसे ऊर्जा मिलती है।
 
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