छात्रों के लिए आईआईटी रुड़की का बड़ा कदम, तैयार कर रहा व्यापक मानसिक स्वास्थ्य नीति का मसौदा

छात्रों के लिए आईआईटी रुड़की का बड़ा कदम, तैयार कर रहा व्यापक मानसिक स्वास्थ्य नीति का मसौदा


उत्तराखंड, 15 फरवरी। उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) ने रविवार को घोषणा की कि उसने अपने कैंपस के लिए एक व्यापक मानसिक स्वास्थ्य नीति का मसौदा तैयार करना शुरू कर दिया है।

इस पहल को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो देश के अन्य आईआईटी संस्थानों के लिए एक मॉडल स्थापित कर सकता है।

इस नीति का पहला ड्राफ्ट संस्थान के वेलनेस सेंटर द्वारा तैयार किया गया है, जो छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराता है।

इस मसौदे को तैयार करने में डीन ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर, एसोसिएट डीन ऑफ स्टूडेंट वेलनेस, आईआईटी रुड़की के क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक, बाहरी सलाहकार और फैकल्टी सदस्यों ने योगदान दिया है, जिससे यह सुनिश्चित किया गया कि नीति पेशेवर अनुभव और संस्थागत समझ दोनों पर आधारित हो।

इस पहल को 'सहयोग 2.0' नामक एक विशेष अंतर-आईआईटी चर्चा कार्यक्रम से भी मजबूती मिली, जिसका उद्देश्य विभिन्न आईआईटी के अनुभवों से सीखना और उनके द्वारा अपनाई गई नीतियों व प्रक्रियाओं को समझना था, ताकि एक व्यापक और समावेशी मानसिक स्वास्थ्य नीति तैयार की जा सके।

सहयोग 2.0, वर्ष 2024 में आयोजित सहयोग 1.0 की सफलता पर आधारित है। यह कार्यक्रम सुप्रीम कोर्ट और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के हालिया निर्देशों के अनुरूप भी है, जिनमें उच्च शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य प्रबंधन को महत्वपूर्ण बताया गया है।

सहयोग 2.0 के दौरान कई मुद्दों पर चर्चा हुई, जैसे मानसिक स्वास्थ्य नीति कैसे बनाई और लागू की जाए, रोकथाम और आपातकालीन सहायता प्रणाली की जरूरत, तथा वेलनेस सेंटर, काउंसलिंग सेल और छात्र कल्याण निकायों की भूमिका। साथ ही संकट की स्थिति में स्पष्ट मानक प्रक्रिया (एसओपी) बनाने और सभी आईआईटी में समान नीति लागू करने पर भी विचार किया गया।

इस कार्यक्रम में सभी आईआईटी के प्रतिनिधि, डीन, फैकल्टी सदस्य और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ शामिल हुए।

इसके अलावा एम्स ऋषिकेश, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल चंडीगढ़, इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री कोलकाता, ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी, मारीवाला हेल्थ इनिशिएटिव, दिल्ली विश्वविद्यालय और उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन फोर्स के विशेषज्ञों ने भी भाग लिया।

उपस्थित विशिष्ट अधिकारियों में सुप्रीम कोर्ट के एक वकील और एक मानवविज्ञानी भी शामिल रहे।

इस पहल पर बोलते हुए आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. केके पंत ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण अब उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता के महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुके हैं।

उन्होंने कहा कि सहयोग 2.0 जैसी पहलें दिखाती हैं कि संस्थान इस जिम्मेदारी को गंभीरता से समझ रहे हैं।
 
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