नई दिल्ली, 14 फरवरी। केंद्रीय कैबिनेट ने दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक के 12 जिलों में अतिरिक्त पटरियां बिछाने की तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर इस फैसले के बारे में विस्तृत जानकारी शेयर की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक के विभिन्न जिलों को कवर करने वाली 3 मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं के लिए कैबिनेट की मंजूरी से रेल बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी, लॉजिस्टिक लागत कम होगी और हमारे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी हुई। इसमें रेल मंत्रालय की तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिनकी कुल लागत लगभग 18,509 करोड़ रुपए है।
इन परियोजनाओं में कसारा-मनमाड तीसरी और चौथी लाइन, दिल्ली-अंबाला तीसरी और चौथी लाइन, बैल्लारी-होसपेट तीसरी और चौथी लाइन शामिल हैं।
पट्टियों की क्षमता बढ़ाए जाने से भारतीय रेलवे की संचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता बेहतर होगी। अतिरिक्त पट्टियां बिछाने के प्रस्ताव से भीड़भाड़ कम करने में मदद मिलेगी। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नए भारत की कल्पना के अनुसार हैं, जो क्षेत्र के लोगों को “आत्मनिर्भर” बनाएंगी। इसके लिए इलाके में बड़े पैमाने पर विकास होगा, जिससे उनके रोजगार/स्व-रोजगार के मौके बढ़ेंगे।
ये परियोजनाएं पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान पर बनाई गई हैं, जिसमें एकीकृत योजना और साझीदार परामर्श के जरिए मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। ये परियोजनाएं लोगों, सामान और सेवाओं को लाने-ले जाने के लिए आसान संपर्क देंगी।
दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्यों के 12 जिलों को कवर करने वाली तीन परियोजनाओं से भारतीय रेलवे का मौजूदा नेटवर्क लगभग 389 किलोमीटर बढ़ जाएगा।
प्रस्तावित अतिरिक्त पट्टियां बिछाने की परियोजना से लगभग 3,902 गांवों तक संपर्क बढ़ेगा, जिनकी आबादी लगभग 97 लाख है।
प्रस्तावित क्षमता बढ़ाने से देश भर के अनेक प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क बेहतर होगा, जिनमें भावली डैम, श्री घाटनदेवी, त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, श्री माता वैष्णो देवी कटरा/श्रीनगर, हम्पी (यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट), बल्लारी किला, दारोजी स्लॉथ बेयर सैंक्चुरी, तुंगभद्रा डैम, केंचनगुड्डा और विजया विट्ठल मंदिर शामिल हैं।
प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, स्टील, लोह अयस्क, सीमेंट, लाइमस्टोन/बॉक्साइट, कंटेनर, अनाज, चीनी, उर्वरक, पीओएल आदि के परिवहन के लिए जरूरी मार्ग हैं। क्षमता बढ़ाने के काम से 96 एमटीपीए (मिलियन टन प्रति वर्ष) के अतिरिक्त माल की ढुलाई होगी। पर्यावरण अनुकूल और कम ऊर्जा का उपयोग करते हुए परिवहन का तरीका अपनाकर रेलवे को जलवायु उद्देश्यों को पूरा करने, देश की लॉजिस्टिक्स लागत कम करने, तेल आयात (22 करोड़ लीटर) घटाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी, जो 4 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।