बढ़ते साइबर फ्रॉड पर वार को कोलकाता पुलिस का मास्टरस्ट्रोक: गठित होंगी सात स्पेशल यूनिट, ठगों पर कसेगी नकेल

कोलकाता पुलिस साइबर फ्रॉड से निपटने को बनाएगी सात स्पेशल यूनिट


कोलकाता, 14 फरवरी। शहर में बढ़ते साइबर फ्रॉड के मामलों पर लगाम लगाने के लिए कोलकाता पुलिस ने अपने साइबर क्राइम विंग के तहत सात नए सेक्शन गठित करने का निर्णय लिया है। इस पहल को राज्य सचिवालय से मंजूरी मिल चुकी है।

पुलिस मुख्यालय लालबाजार के सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी से संबंधित शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए पहले ही एक हेल्पलाइन नंबर शुरू किया है। प्रस्तावित संरचना में मौजूदा साइबर अपराध पुलिस स्टेशन को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा, छह नए अनुभाग संगठित साइबर अपराध, साइबर सुरक्षा एवं साइबर संरक्षा, साइबर धोखाधड़ी वसूली, साइबर फोरेंसिक प्रयोगशाला, साइबर अपराध समन्वय एवं सहायता, और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल का गठन किया गया है।

वर्तमान व्यवस्था के तहत संगठित साइबर अपराध अनुभाग में चार निरीक्षक तैनात किए गए हैं, जबकि अन्य प्रत्येक अनुभाग में दो-दो निरीक्षक स्तर के अधिकारी नियुक्त हैं। इनके साथ उप-निरीक्षक और अन्य पुलिस कर्मी भी तैनात रहेंगे।

पुलिस के अनुसार, संगठित साइबर अपराध अनुभाग विशेष रूप से उन गिरोहों पर नजर रखेगा जो फर्जी पहचान और नकली कॉल सेंटरों के माध्यम से नागरिकों से बड़ी रकम की ठगी कर रहे हैं।

जांच में सामने आया है कि अपराधी अवैध रूप से फर्जी सिम कार्ड हासिल कर उनका इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनमें से कुछ की तस्करी विदेशों तक की जा रही है। निवेश योजनाओं के नाम पर ठगी, तथाकथित ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ और अन्य ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले संगठित तरीके से अंजाम दिए जा रहे हैं।

साइबर सुरक्षा एवं साइबर संरक्षा अनुभाग ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर नियमित जागरूकता अभियान चलाएगा। वहीं, साइबर धोखाधड़ी वसूली अनुभाग ‘गोल्डन आवर’ के भीतर दर्ज शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगी गई रकम की रिकवरी का प्रयास करेगा।

साइबर फोरेंसिक प्रयोगशाला मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों से डेटा निकालने और विश्लेषण करने का काम संभालेगी, जो अपराधियों की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कई साइबर अपराध नेटवर्क देश के विभिन्न शहरों और यहां तक कि कंबोडिया, म्यांमार और नेपाल जैसे देशों से संचालित होते हैं, इसलिए साइबर अपराध समन्वय एवं सहायता अनुभाग विभिन्न अधिकार क्षेत्रों के साथ तालमेल स्थापित करेगा और जरूरत पड़ने पर इंटरपोल की मदद भी लेगा।

पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नजर रखेगा, ताकि अफवाहों के प्रसार और सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोका जा सके।
 
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