कानून से ऊपर कोई नहीं, चाहे शंकराचार्य हों या मंत्री, सीताराम दास महाराज ने सीएम के बयान को बताया सही

कानून से ऊपर कोई नहीं, चाहे शंकराचार्य हों या मंत्री, सीताराम दास महाराज ने सीएम के बयान को बताया सही


अयोध्या, 14 फरवरी। धार्मिक संत और कथावाचक सीताराम दास महाराज ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं हो सकता वाले बयान का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने विधानसभा में जो कहा है, वह बिल्कुल सत्य है।

सीताराम दास महाराज ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि देश संविधान और कानून से चलता है। कानून कोई भी गैर-कानूनी तरीका अपनाने की इजाजत नहीं देता। कानून किसी के साथ पक्षपात नहीं करता। सभी के लिए कानून बराबर है। चाहे वह शंकराचार्य हो या कोई मंत्री, सभी को कानून के दायरे में रहना होगा। कानून का उल्लंघन करने पर सजा जरूर मिलेगी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने जो कहा है, वह शत-प्रतिशत सही है।

साल 2014-15 में जब समाजवादी पार्टी की सरकार द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अपमानित किया गया था, तब क्या वे शंकराचार्य नहीं थे? भाजपा की सरकार में शंकराचार्य ने कानून का उल्लंघन किया है। उन्होंने इमरजेंसी द्वार को बाधित करने का काम किया, जिससे जनता को काफी परेशानी हुई। शासन-प्रशासन की बात को उन्होंने अनसुना कर दिया था। मैं सरकार से प्रार्थना करता हूं कि शंकराचार्य पर उचित कार्रवाई होनी चाहिए।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माघ मेले में शंकराचार्य से जुड़े प्रकरण पर सदन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदेश में कानून सबके लिए समान है और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। यह सदन कानून से चलता है। मैं मुख्यमंत्री हूं, लेकिन कानून मेरे लिए भी वही है जो एक आम नागरिक के लिए है। मर्यादाओं का पालन हर किसी को करना पड़ता है।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार में संबंधित संत पर लाठीचार्ज किया गया था और आज वही लोग नैतिकता की बात कर रहे हैं। जिम्मेदार पद पर बैठा व्यक्ति अमर्यादित आचरण नहीं कर सकता। हम कानून का पालन करना जानते हैं और करवाना भी जानते हैं।

सीएम योगी ने कहा कि जहां साढ़े चार करोड़ श्रद्धालु मौजूद हों, वहां एग्जिट गेट से मेला क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति देना गंभीर खतरे को जन्म दे सकता था। ऐसा कदम भगदड़ का कारण बन सकता था और श्रद्धालुओं के जीवन को खतरे में डाल सकता था। एक मर्यादित व्यक्ति ऐसा कार्य नहीं कर सकता।
 
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