भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर राहुल गांधी के बयान से गरमाई सियासत, भाजपा बोली- किसानों में भ्रम फैला रहे

भारत-अमेरिका ट्रेड डील को राहुल ने बताया किसान विरोधी, भाजपा नेता बोले- भ्रम फैला रहे


नई दिल्ली, 14 फरवरी। भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने लोकसभा में इस व्यापार समझौते को किसान विरोधी बताते हुए कहा था कि इससे देश के कृषि क्षेत्र को नुकसान हो सकता है।

उनके लगातार विरोध के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने पलटवार करते हुए सरकार का पक्ष रखा है। भाजपा नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी किसानों में भ्रम फैला रहे हैं। यह समझौता किसानों के हित में है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, ''सच यह है कि इस ट्रेड डील से किसी भी किसान को नुकसान नहीं होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2019 में आरसीईपी डील से पीछे हटने का फैसला इसलिए लिया था क्योंकि उससे किसानों के हित प्रभावित हो सकते थे। जबकि 2012 में यूपीए सरकार के दौरान इसे लगभग अंतिम रूप देने की कोशिश की गई थी। प्रधानमंत्री मोदी इस बात के लिए प्रतिबद्ध हैं कि कोई भी अंतरराष्ट्रीय समझौता किसानों के हितों के खिलाफ नहीं होगा।''

पंजाब भाजपा नेता फतेह जंग सिंह बाजवा ने भी राहुल गांधी और विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास कहने के लिए ठोस मुद्दा नहीं है। उन्होंने दावा किया कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट कर दिया है कि किसानों या उनके उत्पादों पर इस समझौते का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

बाजवा ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरा सुरक्षा कवच तैयार किया है और किसी भी कीमत पर उनके हितों से समझौता नहीं किया जाएगा।

वहीं, शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पूरी हो चुकी है और इसकी घोषणा स्वयं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की है।

उन्होंने कहा कि टैरिफ को लेकर भी चर्चा हुई है और 18 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक समझौते की विस्तृत शर्तें सार्वजनिक नहीं हुई हैं। ऐसे में यदि कोई राजनीतिक दल या नेता इस डील के नाम पर किसानों को भड़काने की कोशिश करता है तो यह गंभीर और खतरनाक मामला है।

उन्होंने विपक्षी नेताओं से अपील की कि समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होने और पूरी शर्तें सामने आने तक धैर्य रखें, उसके बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचें।
 
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