शिमला, 14 फरवरी। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार को कहा कि राज्य सरकार दूध के लिए समर्थन मूल्य प्रदान कर रही है और जल्द ही अदरक पर भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इससे किसानों को उनकी उपज का उचित दाम सुनिश्चित होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
सराहन में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक वर्ष के भीतर सराहन अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की जाएगी और अल्ट्रासाउंड मशीन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने सराहन में एक सीबीएसई स्कूल खोलने और सराहन-चंडीगढ़ सड़क को डबल लेन करने की भी घोषणा की। इस दौरान उन्होंने स्थानीय कांग्रेस नेता दयाल प्यारी और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गंगू राम मुसाफिर की सभी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य के पहले मुख्यमंत्री डॉ. वाईएस परमार को याद करते हुए कहा कि उन्होंने प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए हिमाचल प्रदेश किरायेदारी और भूमि सुधार अधिनियम, 1972 की धारा 118 लागू की थी, जो गैर-कृषकों को भूमि हस्तांतरण को नियंत्रित करती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार भी उन्हीं के पदचिन्हों पर चलते हुए प्रदेश के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने आरोप लगाया कि 16वें वित्त आयोग ने हिमाचल प्रदेश को मिलने वाला 77 वर्ष पुराना राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद कर दिया है। उन्होंने कहा, “आरडीजी हिमाचल प्रदेश की जनता का अधिकार है, सरकार का नहीं।”
उन्होंने बताया कि भाजपा नेताओं के अनुरोध पर सर्वदलीय बैठक का स्थान बदला गया था, लेकिन भाजपा ने इस मुद्दे पर राज्य के हितों का समर्थन नहीं किया, जबकि अन्य दलों ने सरकार के रुख का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि बैठक में भाजपा नेताओं से पूछा गया था कि क्या वे हिमाचल प्रदेश को आरडीजी मिलने के पक्ष में हैं, लेकिन उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। मुख्यमंत्री ने भाजपा नेताओं से 10,000 करोड़ रुपए की कथित कटौती पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की और कहा कि हिमाचल प्रदेश के लोग भीख नहीं मांग रहे, यह उनका अधिकार है। उन्होंने भाजपा नेताओं को चुनौती देते हुए प्रधानमंत्री से आरडीजी बहाल कराने की अपील करने को कहा।
मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि पिछली भाजपा सरकार को पांच वर्षों में 70,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि मिली थी, लेकिन उसका समुचित उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यदि उस धनराशि का विवेकपूर्ण उपयोग किया गया होता, तो आज राज्य पर 76,000 करोड़ रुपए का कर्ज और 10,000 करोड़ रुपए की देनदारियां नहीं होतीं। उन्होंने दोहराया कि उनकी सरकार राज्य के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेगी और इसके लिए जनता का सहयोग जरूरी है।