असम को मिली ऐतिहासिक सौगात! कैबिनेट ने ब्रह्मपुत्र के नीचे 15.79 किमी रोड-कम-रेल टनल को दी हरी झंडी

कैबिनेट ने असम में कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए दी रोड-कम-रेल टनल को मंजूरी


नई दिल्ली, 14 फरवरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों पर कैबिनेट कमेटी (सीसीईए) की बैठक में असम में इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) के तहत 18,662 करोड़ रुपए की कुल पूंजी लागत से एनएच-15 पर गोहपुर से नुमालीगढ़ तक 715 खंड पर 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी के निर्माण को मंजूरी दी गई है , जिसमें ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे 15.79 किलोमीटर की रोड-कम-रेल टनल भी शामिल है।

वर्तमान में, एनएच-715 पर स्थित नुमालीगढ़ और एनएच-15 पर स्थित गोहपुर के बीच की दूरी एनएच-52 पर सिलघाट के पास स्थित कालियाभम्भोरा सड़क पुल से 240 किलोमीटर है, जिसमें नुमालीगढ़, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और बिश्वनाथ कस्बे से होते हुए 6 घंटे का समय लगता है।

इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए, एनएच-15 पर गोहपुर से नुमालीगढ़ तक ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे रोड-कम-रेल-टनल के साथ 4-लेन पहुंच-नियंत्रित हरित परिवहन परियोजना विकसित करने का प्रस्ताव है। यह भारत की पहली और विश्व की दूसरी अंडरवाटर रोड-कम-रेल-टनल होगी।

सीसीईए ने कहा कि इस परियोजना से असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों को महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा। इससे माल ढुलाई की दक्षता बढ़ेगी, रसद लागत कम होगी और क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक विकास को गति मिलेगी।

यह परियोजना दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच-15 और एनएच-715) और दो रेलवे लाइनों से जुड़ती है, जिनमें गोहपुर की ओर एनएफआर के रंगिया डिवीजन के अंतर्गत रंगिया-मुकोंगसेलेक रेलवे खंड और नुमालीगढ़ की ओर एनएफआर के तिनसुकिया डिवीजन के अंतर्गत फुरकटिंग-मारियानी लूप लाइन खंड शामिल हैं।

यह परियोजना असम के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को निर्बाध रूप से जोड़ती है। इसके अतिरिक्त, यह परियोजना 11 आर्थिक केंद्रों, 3 सामाजिक केंद्रों, 2 पर्यटन केंद्रों और 8 लॉजिस्टिक्स केंद्रों से जुड़कर बहु-मोडल एकीकरण को बढ़ावा देगी, जिससे 4 प्रमुख रेलवे स्टेशनों, 2 हवाई अड्डों और 2 अंतर्देशीय जलमार्गों से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और इस क्षेत्र में माल और यात्रियों की आवाजाही तेज होगी।

सीसीईए के मुताबिक, परियोजना पूर्ण होने पर रणनीतिक दृष्टिकोण, क्षेत्रीय आर्थिक विकास, प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच संपर्क सुदृढ़ करने और व्यापार एवं औद्योगिक विकास के नए द्वार खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह परियोजना लगभग 80 लाख व्यक्ति-दिवस का प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करेगी तथा आसपास के क्षेत्रों में विकास, उन्नति और समृद्धि के नए मार्ग प्रशस्त करेगी।
 

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