पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले वंदे मातरम बना नया सियासी हथियार? अख्तरुल ईमान ने केंद्र पर साधा निशाना

पश्चिम बंगाल में चुनाव होने वाला है, जिस कारण वंदे मातरम विवाद पैदा किया जा रहा: अख्तरुल ईमान


पटना, 14 फरवरी। केंद्र सरकार के हालिया नोटिफिकेशन जिसमें सरकारी कार्यों, स्कूलों और आधिकारिक समारोहों में राष्ट्रगान 'जन गण मन' से पहले 'वंदे मातरम' के सभी छह छंदों का पाठ या गायन अनिवार्य करने को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने साफ तौर पर कहा कि बंकिम चंद्र चटर्जी का आनंदमठ बंगाल से है, और बंगाल में अभी चुनाव होने हैं इसलिए तनाव पैदा किया जा रहा है। पटना में पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि हमारी भारतीय धर्मनिरपेक्षता अपने धर्म को मानना (पालन) और दूसरों के धर्म का सम्मान (आदर) करना बताती है। संविधान का आर्टिकल 25 सभी को अपने धर्म, संस्कृति और रीति-रिवाजों को मानने की आजादी देता है।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या हमारे पूर्वज गांधीजी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, मौलाना आज़ाद राष्ट्रवादी नहीं थे? इन लोगों ने जेल जाकर, डंडे खाकर देश को आजाद किया, वे अक्लमंद नहीं थे? और आज जिन्होंने 50 साल तक अपने कार्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया, वे बड़े देशभक्त बन गए हैं।

उन्होंने भाजपा पर जोरदार निशाना साधते हुए कहा कि असल मामला यह है कि ये लोग उन्मादी हैं, वे उन्माद की राजनीति करते हैं। जिन चीजों से समाज टूटे, वे बातें लाते हैं। उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चटर्जी का आनंदमठ बंगाल से है, और बंगाल में अभी चुनाव होने हैं इसलिए तनाव पैदा किया जा रहा है। इनको पश्चिम बंगाल में चुनाव लड़ना है इसलिए यह विवाद पैदा किया जा रहा है।

बता दें कि केंद्र सरकार ने नया प्रोटोकॉल जारी किया है, जिसमें 'वंदे मातरम' के पूरे छह छंदों (3 मिनट 10 सेकंड) को आधिकारिक संस्करण घोषित किया गया है। इसे राष्ट्रपति के कार्यक्रमों, पुरस्कार समारोहों, स्कूलों और अन्य सरकारी आयोजनों में अनिवार्य बनाया गया है। लोगों को खड़े होकर सम्मान देना भी जरूरी है।
 

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