सीएम योगी के शंकराचार्य बयान पर विवाद बढ़ा, अविमुक्तेश्वरानंद ने पूछा: क्या समर्थक ही होंगे शंकराचार्य?

'शंकराचार्य' पर विवाद बढ़ा, सीएम योगी की टिप्पणी को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दी तीखी प्रतिक्रिया


वाराणसी, 14 फरवरी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में शंकराचार्य वह होता है, जो सनातन धर्म के लिए काम करता है। सनातन धर्म का पहला विशेषण सत्य है, जो सच बोले, गौ माता की रक्षा करे और सनातन धर्म की रक्षा करे।

उत्तर प्रदेश विधानसभा में सीएम योगी के 'हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं हो सकता' वाले बयान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, "(शंकराचार्य) कैसे होते हैं? वह बता दें। जिन्हें वह समझते हैं कि शंकराचार्य ऐसे होते हैं, तो वह स्पष्ट करें। क्या जो उनका समर्थन करे वही शंकराचार्य होगा? जो सनातन धर्म की बात करे, वह शंकराचार्य नहीं होता। यह कैसी परिभाषा लेकर आए हैं? ऐसी परिभाषा कभी नहीं रही।"

इससे पहले, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शंकराचार्य विवाद पर सनातन परंपरा की मर्यादाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि शंकराचार्य का पद भारत की सनातन परंपरा में सर्वोच्च और अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह कोई सामान्य उपाधि नहीं है, जिसे कोई भी व्यक्ति स्वयं ग्रहण कर ले।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने देश की चारों दिशाओं में चार पीठों की स्थापना की थी, उत्तर में ज्योतिष पीठ, दक्षिण में श्रृंगेरी, पूर्व में जगन्नाथपुरी और पश्चिम में द्वारिकापुरी। इन चारों पीठों की अपनी-अपनी परंपरा, दायित्व और आध्यात्मिक आधार हैं। इन पीठों से चार वेद जुड़े हैं- ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। प्रत्येक वेद का अपना महावाक्य है- 'प्रज्ञानं ब्रह्म', 'अहम् ब्रह्मास्मि', 'तत्त्वमसि' और 'अयमात्मा ब्रह्म'। ये महावाक्य भारतीय दर्शन की आत्मा हैं और साधना की उच्चतम अवस्था का बोध कराते हैं। मैं ही ब्रह्म हूं, कोई भी साधक जब अपनी साधना की पराकाष्ठा में पहुंचता है तो उसको इस बात की अनुभूति होती है। यही उपनिषदों का उद्घोष भी है।

शनिवार को अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने बयान में कहा, "केवल एक आदित्यनाथ योगी आ गए, जो रिश्तेदारी निभाते हुए धीरे से मठ में आए और उसके बाद रिश्तेदारी निभाते हुए सीधे मुख्यमंत्री पद पर आकर प्लांट हो गए। वही योग्य हैं? इनके अलावा तो कोई योग्य संसार में है नहीं? यह कैसी परिभाषा आप लोगों ने गढ़ ली?"

उन्होंने कहा कि यह देश बहुत उर्वर है। यहां एक से एक विद्वान, एक से एक कर्मठ लोग और एक से एक योग्य हैं। आप उन्हें मौका तो दीजिए। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, "पाखंडी लोग आकर बैठ गए हैं, अच्छे लोगों को इन्होंने पीछे दबाकर रखा है। एक बार इनका आवरण हटने दीजिए, एक से एक योगी सामने आएंगे और वे प्रदेश को अच्छे से संभालेंगे।"

आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, "ऐसा व्यक्ति मुख्यमंत्री बने जो कानून का पालन करने वाला हो और अपनी प्रजा को अपना बेटा-बेटी समझता हो। इससे ज्यादा अपेक्षा किसी मुख्यमंत्री से नहीं है। जो अहंकार पालता हो, जो मटिया मेट कर देने के लिए तैयार हो जाए, ऐसा व्यक्ति मुख्यमंत्री नहीं होना चाहिए। अगर है तो ये बड़ी भूल है, सुधार लेना चाहिए।"

केशव प्रसाद मौर्य की तरफ से आए बयानों को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, "हमें अच्छा लगा कि कम से कम कोई तो सोच रहा है कि सरकार की जो फजीहत हो रही है, उसे बचाना चाहिए और जिनको चोट लगी है, उन्हें मरहम लगाना चाहिए। उनका (केशव प्रसाद मौर्य) वक्तव्य आया, तो हमने उस समय उसका स्वागत कर दिया। इससे ज्यादा हमारा केशव प्रसाद मौर्या से कोई लेना-देना है।"

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी सुरक्षा के विषय पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "जो हमारी हत्या करना चाहता है, हम उसी से कहें कि हमारी सुरक्षा करो। आप देखिए, गोहत्या में जो सम्मिलित लोग हैं, जिनके बारे में उनका पहले से इतिहास है कि ये गोहत्या में सम्मिलित रहे हैं, गोहत्यारों की मदद करने वाले लोग हैं। वे जब हमारे ऊपर आक्रमण कर रहे हैं, जब यूपी पुलिस हमारे ऊपर आक्रमण कर रही है। इस समय हम यूपी में बैठे हैं, हम किससे मांग करें?"
 
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