'सेवा तीर्थ' : सुशासन की नई पहचान, 2014 से ब्रिटिश राज के प्रतीकों पर ऐसे लग रहा विराम

'सेवा तीर्थ' बनेगा सुशासन की नई पहचान, 2014 से ब्रिटिश राज के प्रतीकों पर ऐसे लग रहा विराम


नई दिल्ली, 13 फरवरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारत की जनता की सेवा करने के अपने अटूट संकल्प को दोहराते हुए और 'नागरिकदेवो भव' की पावन भावना को इसकी मार्गदर्शक शक्ति के रूप में रेखांकित करते हुए, 'सेवा तीर्थ' राष्ट्र को समर्पित किया।

पीएम मोदी ने कहा कि सेवा तीर्थ का समर्पण जनसेवा और नागरिकों के कल्याण के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 'सेवा तीर्थ' कर्तव्य, करुणा और 'इंडिया फर्स्ट' (भारत प्रथम) के सिद्धांत के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के एक उज्ज्वल और शक्तिशाली प्रतीक के रूप में विद्यमान है।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह आने वाली पीढ़ियों को निस्वार्थ सेवा और सभी के कल्याण के प्रति अथक समर्पण के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करेगा और हर नागरिक की भलाई के लिए समर्पण भाव से आगे बढ़ने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना जारी रखेगा।

प्रधानमंत्री मोदी का यह कदम उनके सत्ता में आने के बाद से जनता की मानसिकता में आए एक गहरे बदलाव को भी दर्शाता है।

औपनिवेशिक अतीत की झलक दिखाने वाली संरचनाओं को समाप्त करने और सार्वजनिक संस्थानों का नामकरण एवं पुनर्सृजन करने का सुनियोजित प्रयास मोदी सरकार के सार्वजनिक सेवा को शासन का सर्वोच्च स्थान बनाने के लक्ष्य और उद्देश्य को रेखांकित करता है।

प्रधानमंत्री कार्यालय का नामकरण और उसे 'सेवा तीर्थ' में स्थानांतरित करना इसी दिशा में उठाया गया एक कदम है। इसमें कैबिनेट सचिवालय, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय और इंडिया हाउस जैसे कार्यालय शामिल हैं। इसके साथ ही, कर्तव्य भवन 1 और 2 का भी उद्घाटन किया गया है, जहां से रक्षा और विदेश मंत्रालय सहित कई उच्च-स्तरीय मंत्रालय अब एकीकृत रूप से कार्य करेंगे।

इससे पता चलता है कि केंद्र सरकार 'नागरिक-प्रथम' को शासन का केंद्र बनाने और उन इमारतों की सत्ताधारी छवि को मिटाने के लिए दृढ़ संकल्पित है।

इससे पहले, गृह मंत्रालय के निर्देश पर कई राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों ने उपराज्यपालों के आवासों का नाम राज निवास से बदलकर लोक निवास कर दिया था।

2022 की शुरुआत में, राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ कर दिया गया था। इस ऐतिहासिक मार्ग के नामकरण ने सरकार के अधिकार को कर्तव्य से बदलने के इरादे को फिर से पुष्ट किया।

2016 में, प्रधानमंत्री आवास का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग कर दिया गया था। उस समय यह कदम भले ही छोटा लगा हो, लेकिन इसका संदेश बहुत गहरा था, जो जनता को यह याद दिलाता था कि शासन का मूल उद्देश्य जन कल्याण है। सदियों से, प्रधानमंत्री आवास को 7 रेस कोर्स रोड (आरसीआर) के नाम से जाना जाता था।

अब प्रधानमंत्री कार्यालय का नया पता 'सेवा तीर्थ' है। कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय एक ही परिसर में स्थित होने के साथ, यह प्रतिष्ठित इमारत प्रधानमंत्री कार्यालय के कामकाज के तरीके को पूरी तरह से बदल देगी, जिसमें सेवा भावना और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को सर्वोपरि रखा जाएगा।
 

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