पोनियिन सेलवन-2 गाने पर विवाद: फैयाज डागर का रहमान पर ताल चोरी का आरोप, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

फैयाज डागर और एआर रहमान के बीच संगीत विवाद, सुप्रीम कोर्ट में अगले शुक्रवार को होगी सुनवाई


मुंबई, 13 फरवरी। भारतीय शास्त्रीय गायक उस्ताद फैयाज वसीफुद्दीन डागर और संगीतकार एआर रहमान के बीच फिल्म पोनियिन सेलवन-2 के गाने को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई अगले शुक्रवार तक के लिए टाल दी है।

शुक्रवार को हुई सुनवाई में दोनों पक्षों के वकीलों ने अपना पक्ष रखा। उस्ताद फैय्याज वासिफुद्दीन डागर के वकील ने कोर्ट में दावा किया है कि भले ही गाने के बोल अलग हैं और हमारा दावा ध्रुपद शैली के गायन या बंदिश पर भी नहीं है, लेकिन गाने में जिस बीट का इस्तेमाल किया गया है, उसे याचिकाकर्ता के पिता नासिर फैयाजुद्दीन डागर और चाचा जहीरुद्दीन डागर ने लिखा है, जिसका गायन कई बार वे मंचों पर कर चुके हैं।

वकील ने दावा किया कि लगभग आठवीं सदी पहले अमीर खुसरो ने चौताल का ईजाद किया था, जबकि नासिर फैयाजुद्दीन डागर और चाचा जहीरुद्दीन ने सूलताल को ईजाद किया था। गायन में चौताल गाने की परंपरा सदियों से चली आई है, लेकिन उनके परिवार में सूलताल में गायन किया जाता है।

उस्ताद फैयाज वसीफुद्दीन डागर के वकील का दावा है कि नासिर फैयाजुद्दीन डागर और चाचा जहीरुद्दीन डागर द्वारा रचित "शिव स्तुति" का उपयोग रहमान ने बिना अनुमति के किया है। गाने "वीरा राजा वीरा" के बोल भले ही अलग हों, लेकिन इसका ताल, बीट और संगीत संरचना "शिव स्तुति" के समान है, तो फैयाज राइट एक्ट का उल्लंघन करता है।

मामले पर सुनवाई कर रहे चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि डागर परिवार को किसी परिचय की जरूरत नहीं है और शास्त्रीय संगीत को पीढ़ीगत ऊंचे स्तर पर ले जाने का काम डागर परिवार ने किया, लेकिन साथ ही एआर रहमान भी संगीत की दुनिया का जाना-माना नाम हैं। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने आगे कहा कि अगर डागर परिवार ने भारतीय संगीत में योगदान नहीं दिया होता, तो क्या आपको लगता है कि ये आधुनिक गायक बाजार में जीवित रहते?

एआर रहमान के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सुनवाई टालने का आग्रह किया, जिसके बाद अब मामले को लेकर सुनवाई अगले शुक्रवार को होगी।

ये पूरा विवाद बीते साल से चल रहा है, जहां पहले हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने एआर रहमान को बीट का क्रेडिट देते हुए 2 करोड़ रुपए जमा करने का आदेश दिया था, लेकिन डबल बेंच के जजों ने फैसला पलटते हुए कहा था कि ऐसा कोई सबूत नहीं है कि शिव स्तुति डागर बंधुओं द्वारा ही रची गई है।
 
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