नई दिल्ली, 13 फरवरी। लोकसभा के बजट सत्र के पहले चरण की समाप्ति के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा का आरोप है कि विपक्ष के सांसदों के पास कोई मुद्दा नहीं था, इसीलिए इन लोगों ने संसद को चलने नहीं दिया और लगातार विरोध प्रदर्शन करते रहे।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सत्र का पहला भाग समाप्त हो चुका है, लेकिन जिस तरह कांग्रेस और पूरे विपक्ष ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार किया और संसद की कार्यवाही में व्यवधान डाला, वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। विपक्ष को अपने अंतर्मन में झांकने की जरूरत है और संसदीय प्रक्रियाओं को तोड़ने-मरोड़ने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए।
शेखावत ने कहा कि सरकार ने देश के विकास को गति देने वाला बजट पेश किया, जो एक गाइडिंग फ्रेमवर्क के रूप में काम करेगा। राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद बजट पर जिस स्तर की गंभीर और गुणवत्तापूर्ण चर्चा होनी चाहिए थी, वह नहीं हो सकी।
उन्होंने विपक्ष पर किसानों के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जिन्हें खेती-किसानी की बुनियादी समझ नहीं है, उन्हें किसानों के हितों पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है।
केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा ने भी बजट को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इसमें किसानों, महिलाओं और ग्रामीण विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंडी गठबंधन के नेताओं ने बजट सत्र में व्यवधान डालने का प्रयास किया, जो लोकतंत्र की भावना के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने कहा कि देश की निगाहें सदन की कार्यवाही पर होती हैं और ऐसे में सार्थक चर्चा होनी चाहिए थी। यह बजट 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का रोडमैप प्रस्तुत करता है और कृषि बजट में भी वृद्धि की गई है।
वहीं, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बयान पर कहा, "राहुल गांधी को तर्कहीन बात करने की आदत है। वे क्या जानें किसानी, क्या होता है किसान, क्या काम करता है किसान? यह उन्हें पता है? प्रधानमंत्री मोदी के हाथों में जब तक देश की सत्ता है, तब तक देश के किसान का हित सुरक्षित है। राहुल गांधी को कुछ नहीं पता है। एक बार बिहार चुनाव में फोटो खिंचाने के लिए नदी में घुस गए। उन्हें पता है, मखाना की खेती कैसे होती है?"