लखनऊ, 12 फरवरी। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में प्रदेश के शहरों में बढ़ते अतिक्रमण और बदहाल यातायात व्यवस्था का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक ने नियम 110 के तहत इसे लोक महत्व का आविलंबनीय विषय बताते हुए सरकार से ठोस और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की।
सभापति ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए इसे आवश्यक कार्यवाही के लिए सरकार को संदर्भित कर दिया। सदन में चर्चा के दौरान कहा गया कि प्रदेश में तेजी से हो रहे शहरी विकास और स्वच्छता रैंकिंग में सुधार के बावजूद अतिक्रमण की समस्या लगातार विकराल होती जा रही है। प्रमुख चौराहों और बाजारों में अनियोजित ढंग से फैल रहे अतिक्रमण के कारण यातायात व्यवस्था चरमरा गई है, जिससे आम नागरिकों को रोजाना जाम, दुर्घटनाओं और देरी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।
सदस्य ने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से शहरों को अतिक्रमण मुक्त बनाने और व्यवस्थित कारोबार के लिए मॉडल वेंडिंग जोन विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। कुछ नगर निकायों ने पहल भी की है, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने स्थानीय निकायों की शिथिलता और समन्वय की कमी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।
गाजियाबाद, मुरादाबाद, वाराणसी, गोरखपुर, कानपुर, बरेली, अलीगढ़ और मेरठ समेत कई नगर निगम क्षेत्रों के प्रमुख मार्गों और चौराहों पर अतिक्रमण की स्थिति गंभीर बताई गई। राजधानी लखनऊ में भी विभूति खंड जैसे चुनिंदा क्षेत्रों को छोड़ अन्य इलाकों में हालात चिंताजनक बताए गए।
सदन में नगर निगम अधिनियम के तहत गठित टाउन वेंडिंग कमेटी (टीवीसी) की निष्क्रियता पर भी सवाल उठे। बताया गया कि लखनऊ नगर निगम में करीब दस महीनों से टीवीसी की बैठक नहीं हुई, जबकि नियमों के अनुसार प्रत्येक माह बैठक अनिवार्य है। इस समिति में पार्षदों, रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं, व्यापारिक संगठनों, पुलिस, ट्रैफिक पुलिस, लोक निर्माण विभाग, विकास प्राधिकरण, विद्युत विभाग, आवास विकास और डूडा के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
मांग की गई कि सभी नगर निगमों में टाउन वेंडिंग कमेटियों की नियमित बैठकें सुनिश्चित कर समन्वित कार्रवाई की जाए, ताकि अतिक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो और शहरों की यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाया जा सके।