चंडीगढ़ में क्रिप्टो पोंजी स्कीम पर ईडी का प्रहार: 6.20 करोड़ की संपत्ति जब्त, कालरा-तनेजा पर शिकंजा

चंडीगढ़: ईडी ने क्रिप्टो पोंजी स्कीम में 6.20 करोड़ की संपत्तियां अटैच कीं, विकास कालरा-तरुण तनेजा मुख्य आरोपी


चंडीगढ़, 12 फरवरी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के चंडीगढ़ जोनल ऑफिस ने क्रिप्टो से जुड़े एक बड़े पोंजी स्कीम और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सख्त कार्रवाई की है। ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत कुल 6.20 करोड़ रुपए की संपत्तियां प्रोविजनली अटैच (जब्त) कर ली हैं। इसमें 4.50 करोड़ रुपए की 7 अचल संपत्तियां और 1.70 करोड़ रुपए नकद शामिल हैं।

ईडी ने हरियाणा पुलिस द्वारा विकास कालरा, तरुण तनेजा और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। यह एफआईआर कई निवेशकों की शिकायतों पर दर्ज की गई थी। जांच में पता चला कि आरोपी कई पुलिस थानों में अलग-अलग एफआईआर के दायरे में हैं। मुख्य आरोपी विकास कालरा और तरुण तनेजा ने 'क्रिप्टो वर्ल्ड ट्रेडिंग कंपनी' के नाम से एक फर्जी और अस्तित्वहीन कंपनी बनाई।

आरोपियों ने इस फर्जी कंपनी की वेबसाइट बनाकर हजारों निर्दोष निवेशकों को बहुत ज्यादा रिटर्न (हाई रिटर्न) का लालच दिया। निवेशकों से पैसे लेकर उनकी यूजर आईडी बनाई गई और क्रेडिट पॉइंट्स के रूप में रिटर्न दिखाए गए। लेकिन ये पॉइंट्स रिडीम (नकद में बदलने) तभी हो सकते थे, जब निवेशक नए लोगों को कंपनी में जोड़ते। यह क्लासिक पोंजी स्कीम का तरीका था, जहां पुराने निवेशकों को नए निवेशकों के पैसे से रिटर्न दिया जाता था।

जांच में सामने आया कि करोड़ों रुपए के निवेश मुख्य रूप से कैश, बैंक अकाउंट्स और क्रिप्टो वॉलेट्स के जरिए लिए गए। ईडी ने संदिग्धों और उनके परिवार के सदस्यों के कई बैंक अकाउंट्स की जांच की। इसमें पता चला कि अपराध से हुई कमाई को अलग-अलग बैंक अकाउंट्स और क्रिप्टो वॉलेट्स के माध्यम से लेयरिंग (परत-दर-परत ट्रांसफर) करके लॉन्ड्र किया गया। अंत में यह रकम परिवार के सदस्यों के नाम पर अचल संपत्तियों में निवेश कर दी गई।

क्राइम से प्राप्त कैश का सीधा इस्तेमाल भी अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया। अटैच की गई 7 अचल संपत्तियां मुख्य आरोपी और उनके परिवार के नाम पर हैं, जिनकी कुल वैल्यू 4.50 करोड़ रुपए है। इसके अलावा 1.70 करोड़ रुपए नकद भी जब्त किए गए हैं। ये संपत्तियां क्राइम प्रोसीड्स (अपराध से हुई कमाई) या उसके बराबर मूल्य की हैं।

ईडी ने इन संपत्तियों के ट्रांसफर, बिक्री या किसी तरह के डिस्पोजल को रोकने के लिए प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया है। इस मामले में और गिरफ्तारियां और संपत्ति अटैचमेंट होने की संभावना है।
 
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