बीजिंग, 12 फरवरी। चीनी नव वर्ष की सुनहरी शाम ढल रही है, और पूरे चीन में घर-घर दीयों की रोशनी बिखर रही है। लेकिन इससे पहले कि परिवार एक साथ बैठकर बीते साल की यादों को संजोएं और नए साल का स्वागत करें, एक अदृश्य सेतु उनकी इस खुशी को और अधिक रंगीन बना रहा है। यह सेतु है—यिवू। पूर्वी चीन के चच्यांग प्रांत का यह छोटा-सा शहर आज दुनिया के सबसे बड़े छोटे वस्तु बाजार के रूप में जाना जाता है। और स्प्रिंग फेस्टिवल से पहले यहाँ का नज़ारा किसी महाकुंभ से कम नहीं होता।
यिवू इंटरनेशनल ट्रेड सिटी की गलियों में इन दिनों सिर्फ सामान नहीं, बल्कि संस्कृति, भावना और विश्वास बिक रहा है। एक ओर दुकानों पर सजे लाल लिफाफे, रंग-बिरंगे पटाखे और पारंपरिक चीनी मिठाइयों के पैकेट ग्राहकों को अपनी ओर खींच रहे हैं, तो दूसरी ओर अश्व वर्ष पर आधारित ब्लाइंड बॉक्स, एक्शन फिगर और की-चेन युवाओं की पहली पसंद बन रहे हैं। सबसे दिलचस्प उदाहरण है—एक घोड़े की गुड़िया, जिसका मुँह सिलाई में गलती से टेढ़ा हो गया था। यह गुड़िया आज चीन की सबसे अधिक बिकने वाली वस्तुओं में से एक है। क्यों? क्योंकि यह सिर्फ एक खिलौना नहीं, बल्कि एक भावना है। यह उस बदलाव का प्रतीक है, जो आज चीनी बाजार में देखने को मिल रहा है—उपभोक्ता अब केवल वस्तु नहीं, बल्कि उससे जुड़ी अनुभूति खरीद रहे हैं।
यह बदलाव बताता है कि चीनी स्प्रिंग फेस्टिवल अब केवल धार्मिक अनुष्ठानों या पारिवारिक रस्मों तक सीमित नहीं रह गया है। यह एक जीवंत आर्थिक और सांस्कृतिक महोत्सव बन चुका है, जहाँ परंपरा और आधुनिकता एक-दूसरे के पूरक हैं। यिवू का यह वार्षिक बाज़ार चीनी अर्थव्यवस्था की उस गहरी ताकत को दर्शाता है, जो ज़मीनी स्तर पर काम करती है। यह वह ताकत है, जो छोटे-छोटे व्यापारियों के हाथों से बड़े-बड़े आर्थिक आंकड़े गढ़ती है।
आंकड़े गवाह हैं—वर्ष 2025 में यिवू के माध्यम से आयातित वस्तुओं में 32.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। श्रीलंका से स्क्विड, इक्वाडोर से झींगा, मलेशिया से स्कैलप्स—दुनिया के कोने-कोने से खाद्य सामग्री यिवू के रास्ते चीनी परिवारों की थाली तक पहुँच रही है। यह सिर्फ व्यापार नहीं, यह वैश्वीकरण की वह मूक क्रांति है, जो चीनी संस्कृति को दुनिया के करीब ला रही है।
यिवू का व्यापारी आज अंग्रेजी, अरबी, स्पेनिश और हिंदी में बातचीत करता है। वह जानता है कि उसकी दुकान पर सिर्फ चीन के नहीं, बल्कि दुनिया के कोने-कोने से मेहमान आते हैं। यह वैश्विक दृष्टिकोण ही चीनी संस्कृति की सबसे बड़ी पूंजी है, और यही पूंजी चीन को हर संकट से उबारने में सक्षम बनाती है।
स्प्रिंग फेस्टिवल सिर्फ एक पर्व नहीं है। यह चीनी समाज की सामूहिक चेतना का महाकुंभ है। यह वह समय है जब परिवार एक साथ आते हैं, पुरानी कड़वाहटें भुलाई जाती हैं, और नए संकल्प लिए जाते हैं। यह वह समय है जब एक दुकानदार अपनी दुकान पर सजी लाल पट्टिका के साथ सिर्फ लकड़ी का एक टुकड़ा नहीं बेचता, बल्कि सौभाग्य और समृद्धि का वादा बेचता है। यह वह समय है जब एक मिठाई की डिबिया सिर्फ चीनी नहीं, बल्कि मिठास और अपनापन बेचती है।
यही भावना चीनी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यही वह अदृश्य धागा है जो चीनी समाज को एक सूत्र में बाँधता है और उसे हर मुश्किल से पार लगाता है। यिवू का यह बाज़ार हमें सिखाता है कि विकास सिर्फ पूँजी और तकनीक से नहीं होता। विकास के लिए संस्कृति की जड़ें गहरी होनी चाहिए, और विश्वास का सागर विशाल होना चाहिए।
आज जब पूरा चीन स्प्रिंग फेस्टिवल की तैयारियों में जुटा है, यिवू की दुकानें रोशन हैं। यह रोशनी सिर्फ बिजली की नहीं, बल्कि उम्मीदों की है। यह रोशनी बताती है कि जब तक चीनी परिवार नए साल का स्वागत करने के लिए लाल दीये जलाएँगे, यिवू के व्यापारी अपनी दुकानों पर मुस्कुराते रहेंगे। और जब तक यिवू की दुकानें मुस्कुराती रहेंगी, चीनी अर्थव्यवस्था नए कीर्तिमान स्थापित करती रहेगी।
यिवू सिर्फ एक बाज़ार नहीं है। यह चीन की उस अदम्य भावना का प्रतीक है, जो परंपरा को संजोए रखती है, आधुनिकता को गले लगाती है, और भविष्य की ओर बढ़ते हुए कभी नहीं थकती। यह स्प्रिंग फेस्टिवल बाज़ार हमें बताता है कि चीन की ताकत सिर्फ उसकी अर्थव्यवस्था में नहीं, बल्कि उसके उन करोड़ों परिवारों में है, जो हर साल इस पर्व को नई उमंग के साथ मनाते हैं। और यही उमंग, यही विश्वास, यही चीनी संस्कृति की अमर गाथा है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)