नई दिल्ली, 12 फरवरी। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को आईआरसीटीसी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के खिलाफ आरोप तय करने पर आदेश सुरक्षित रख लिया। कोर्ट अब 3 मार्च को अपना फैसला सुनाएगा।
ईडी की चार्जशीट लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत 16 आरोपियों के खिलाफ है। ईडी ने अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में लालू यादव का पूरा नाम शामिल किया था।
ईडी के अनुसार, पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव पर मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप है। साथ ही, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, मीसा भारती, हेमा यादव और तेज प्रताप यादव पर घोटाले से आर्थिक फायदा होने का आरोप है।
वहीं, इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाओं के साथ-साथ राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव द्वारा दायर ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने की एप्लीकेशन पर सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) को नोटिस जारी किया था।
13 अक्टूबर 2025 को दिए गए एक आदेश में राऊज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज (पीसी एक्ट) विशाल गोगने ने लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, उनके बेटे तेजस्वी यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120बी (आपराधिक साजिश) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत ट्रायल का रास्ता साफ कर दिया, जब उन्होंने आरोपों को स्वीकार नहीं किया था।
स्पेशल कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार के सदस्यों, प्रेम गुप्ता, सरला गुप्ता और रेलवे अधिकारियों राकेश सक्सेना और पीके गोयल के खिलाफ आरोप तय करने के मुद्दे पर विस्तार से दलीलें सुनने के बाद 29 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
यह घोटाला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। उनके कार्यकाल के दौरान, कथित तौर पर तय नियमों का पालन किए बिना दो आईआरसीटीसी होटल लीज पर दिए गए थे। इनमें से एक होटल सरला गुप्ता को अलॉट किया गया था, जो आरजेडी प्रमुख के करीबी और उस समय राज्यसभा सदस्य प्रेम गुप्ता की पत्नी हैं। ईडी का आरोप है कि इन जमीनों के ट्रांसफर के जरिए अवैध धन को सफेद करने की कोशिश की गई, जिसकी कुल वैल्यू करोड़ों में आंकी गई है।