सबरीमाला मंदिर में बड़ा वित्तीय घोटाला? केरल हाई कोर्ट ने ग्लोबल अयप्पा मीट समेत कई गंभीर आरोपों पर कसी जांच

केरल हाई कोर्ट ने सबरीमाला के फाइनेंस पर जांच कड़ी की


कोच्चि, 12 फरवरी। केरल हाई कोर्ट को सबरीमाला मंदिर में फाइनेंशियल गड़बड़ियों से जुड़े दो गंभीर आरोपों की जानकारी दी गई है। पहला आरोप पिछले साल आयोजित हुए ग्लोबल अयप्पा मीट से जुड़ा है और दूसरा हाल ही में खत्म हुए मंडला-मकरविलक्कू सीजन में टेम्पररी स्टाफ द्वारा संदिग्ध मनी ट्रांसफर से संबंधित है।

हाई कोर्ट को सौंपी गई रिपोर्ट में त्रावणकोर देवासम बोर्ड के स्पेशल कमिश्नर ने ग्लोबल अयप्पा मीट के आयोजन में गंभीर कमियों की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह इवेंट कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करते हुए और फाइनेंशियल ट्रांसपेरेंसी के बिना आयोजित किया गया था। सही अकाउंट और सपोर्टिंग बिल नहीं बनाए गए थे और पंडाल बनाने तथा उससे जुड़े कामों के कॉन्ट्रैक्ट बिना टेंडर बुलाए दे दिए गए थे।

खबर है कि यह काम एक इवेंट मैनेजमेंट फर्म को 10 प्रतिशत अतिरिक्त कीमत पर दिया गया था, जो उरालुंगल लेबर कॉन्ट्रैक्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी की सब्सिडियरी है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अकाउंट्स में जीएसटी बिल और अन्य जरूरी दस्तावेजों की कमी है, जिससे देवासम बोर्ड को बड़ा फाइनेंशियल नुकसान हो सकता है। सबकॉन्ट्रैक्ट्स का सही से दस्तावेजीकरण नहीं किया गया था और इन्हें ऑडिट के लिए पेश नहीं किया गया।

जमा किए गए बिलों में गड़बड़ियों की वजह से ऑडिटर सही अकाउंट्स को फाइनल नहीं कर पाए। डेकोरेटिव कामों का शुरुआती अनुमान 2 लाख रुपए था। लेकिन, कथित तौर पर खर्च बढ़कर 8 लाख रुपए हो गया।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 2 करोड़ रुपए का स्पॉन्सरशिप रेवेन्यू अभी भी स्पष्ट नहीं है। इसके अलावा, वीआईपी कैटरिंग और रिपेयर जैसे काम भी बिना टेंडर के दिए गए। कॉन्ट्रैक्टर्स को हैंडलिंग चार्ज के रूप में एकतरफा तौर पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान किया गया और हर आइटम पर खर्च की डिटेल्स नहीं दी गई।

कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक तिरुवंचूर राधाकृष्णन ने कहा कि उन्होंने यह मुद्दा पहले केरल विधानसभा में उठाया था। उन्हें जो जानकारी दी गई थी, रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है, क्योंकि इसमें बड़े बदलाव हुए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें बताया गया था कि ग्लोबल अयप्पा मीट का खर्च स्पॉन्सरशिप से किया जाएगा। लेकिन, अब जो रिपोर्ट सामने आई है, वह बिल्कुल अलग है। असेंबली में यह बताया गया था कि टीडीबी फंड से खर्च किया गया पैसा स्पॉन्सरशिप के पैसे से वापस कर दिया गया है। लेकिन, रिपोर्ट के अनुसार ऐसा नहीं हुआ है।

सीडब्ल्यूसी मेंबर और सीनियर विधायक रमेश चेन्निथला ने कहा कि सामने आई जानकारी के अनुसार मीटिंग के लिए 7 करोड़ रुपए खर्च किए गए। उन्होंने कहा कि मीट में उम्मीद के मुताबिक लोग बहुत कम आए, लेकिन खर्च से ऐसा लगता है कि बहुत ज्यादा लोग आए थे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सही जांच नहीं हुई, तो वे सुनिश्चित करेंगे कि इसकी पूरी जांच हो और जिम्मेदारों को सजा दी जाए।

इसी से जुड़े एक अन्य मामले में, हाई कोर्ट ने मंडला-मकरविलक्कू सीजन के दौरान काम पर रखे गए टेम्पररी कर्मचारियों से जुड़े संदिग्ध फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की जांच का आदेश दिया है। स्पेशल कमिश्नर की एक रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने यह कदम उठाया, जब पता चला कि पोस्ट ऑफिस के जरिए थोड़े समय में 14 लाख रुपये से ज्यादा ट्रांसफर किए गए थे।

बताया गया है कि दो कर्मचारियों ने 1-1 लाख रुपए से अधिक भेजे, जबकि तीन अन्य ने 25,000 रुपए से ज्यादा ट्रांसफर किए। ये कर्मचारी पूछताछ के लिए पेश नहीं हुए।

टेम्पररी स्टाफ, जिन्हें रोजाना 650 रुपए पर रखा गया था और सीजन के बाद एकमुश्त भुगतान किया जाता था, तीर्थयात्रा के दौरान अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को मनी ऑर्डर और बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए पैसे ट्रांसफर करते पाए गए। विजिलेंस अधिकारियों को शक है कि यह पैसा सबरीमाला में गैरकानूनी तरीके से कमाया गया।

कोर्ट ने 2025-26 के दौरान सन्निधानम में बैंकों और पोस्ट ऑफिस में हुए सभी ट्रांजैक्शन की पूरी जांच करने का निर्देश दिया है और तीन हफ्ते के अंदर विस्तृत रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया है।
 

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