'वंदे मातरम' अनिवार्यता पर मदनी की हुंकार: बोले- धार्मिक स्वतंत्रता पर खुला हमला, अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनने की साजिश

अरशद मदनी ने 'वंदे मातरम' को सरकारी कार्यक्रमों में अनिवार्य करने के फैसले का किया विरोध


नई दिल्ली, 12 फरवरी। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने 'वंदे मातरम' गीत को सरकारी कार्यक्रमों में अनिवार्य करने के फैसले का विरोध किया है। मदनी ने इसे पक्षपाती और जबरदस्ती थोपा गया फैसला बताया है।

अरशद मदनी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत के रूप में सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों, कॉलेजों और आयोजनों में इसकी समस्त पंक्तियों को अनिवार्य करना केंद्र सरकार का न सिर्फ एक पक्षपाती और जबरदस्ती थोपा गया फैसला है, बल्कि यह संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता पर खुला हमला और अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनने का निंदनीय प्रयास है।"

मदनी ने आगे लिखा, "मुसलमान किसी को 'वंदे मातरम' पढ़ने या उसकी धुन बजाने से नहीं रोकते, मगर क्योंकि उसकी कुछ पंक्तियां बहुदेववादी आस्था पर आधारित हैं और मातृभूमि को ईश्वर के रूप में प्रस्तुत करती हैं, जो एकेश्वरवादी धर्म की आस्था से टकराती हैं, इसलिए मुसलमान, जो सिर्फ एक अल्लाह की वंदना करता है, उसको इसे पढ़ने पर विवश करना संविधान की धारा 25 और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का खुला उल्लंघन है।"

अरशद मदनी ने यह भी कहा कि इस गीत को अनिवार्य कर देना और नागरिकों पर थोपने का प्रयास वास्तव में देशप्रेम नहीं, बल्कि चुनावी राजनीति, सांप्रदायिक एजेंडे और जनता का ध्यान मूल समस्याओं से हटाने की सोची-समझी चाल है। मदनी ने कहा, "मातृभूमि से प्रेम का आधार नारे नहीं, बल्कि चरित्र और बलिदान हैं, जिनका उज्ज्वल उदाहरण मुसलमानों और जमीयत उलमा-ए-हिंद का अभूतपूर्व संघर्ष है। इस प्रकार के फैसले देश की शांति, एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने के साथ-साथ संविधान का भी उल्लंघन हैं।"

अपनी पोस्ट में मदनी ने लिखा, "मुसलमान सिर्फ एक अल्लाह की इबादत करता है। हम सब कुछ बर्दाश्त कर सकते हैं, मगर अल्लाह के साथ किसी को शरीक करना कभी स्वीकार नहीं कर सकते। इसलिए 'वंदे मातरम' को अनिवार्य कर देना संविधान की आत्मा, धार्मिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर खुला हमला है।"

बता दें कि केंद्र सरकार ने बुधवार को राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गायन को अनिवार्य करने का फैसला लिया। दिशा-निर्देशों के अनुसार, सरकारी कार्यक्रमों, स्कूल-कॉलेजों में 'वंदे मातरम' और 'राष्ट्रगान' दोनों होने हैं। पहले 'वंदे मातरम' (राष्ट्रगीत) गाया जाएगा और उसके बाद 'राष्ट्रगान'। राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे गाए जाएंगे और इसकी कुल अवधि लगभग 3 मिनट और 10 सेकंड है।
 

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