भारत बंद में ट्रेड यूनियनों की दरार: NFITU ने हड़ताल को बताया राजनीतिक स्टंट, मोदी सरकार का किया समर्थन

भारत बंद पर बंटी ट्रेड यूनियनें: एनएफआईटीयू ने हड़ताल से किया किनारा, सरकार की नीतियों का समर्थन


बेंगलुरु, 12 फरवरी। एक ओर जहां 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियन और किसान संगठन केंद्र सरकार की कथित 'मजदूर विरोधी' नीतियों के खिलाफ गुरुवार को राष्ट्रव्यापी हड़ताल और भारत बंद पर हैं, वहीं कर्नाटक से नेशनल फ्रंट ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (एनएफआईटीयू) ने इस हड़ताल से खुद को अलग कर लिया है। संगठन के अध्यक्ष वी. वेंकटेश ने साफ कहा कि इस हड़ताल के पीछे सिर्फ राजनीति है और उनकी यूनियन इसमें हिस्सा नहीं लेगी।

वी. वेंकटेश ने आईएएनएस से कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए सभी श्रम सुधार मजदूरों के हित में हैं। हमने सभी संबद्ध ट्रेड यूनियनों को निर्देश दिया है कि वे हड़ताल में भाग न लें। जो यूनियनें हमारे साथ हैं, वे गुरुवार को काम करेंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल, खासकर वामपंथी दल, इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रहे हैं।

एनएफआईटीयू अध्यक्ष ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार नए लेबर कोड का स्वागत किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया और सचिव वंदना गुरनानी की सराहना करते हुए कहा कि ये कोड मजदूरों के हित में हैं। वेतन संहिता (वेज कोड) लंबे समय से लंबित थी, जिसे अब पूरे देश में एक समान रूप से लागू किया गया है। इसे उन्होंने सकारात्मक कदम बताया।

वेंकटेश ने 16 जनवरी को केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया से हुई अपनी मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने मंत्री से भविष्य निधि (प्रोविडेंट फंड) की सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया है।

उन्होंने फिक्स्ड-टर्म ट्रेनी व्यवस्था का भी समर्थन किया। उनके मुताबिक पहले प्रशिक्षण अवधि पूरी होने के बाद ट्रेनी कर्मचारियों को हटा दिया जाता था, लेकिन अब केंद्र सरकार ने व्यवस्था की है कि प्रशिक्षण पूरा करने वाले कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा। इसे उन्होंने मजदूरों के लिए बड़ा लाभ बताया।

हड़ताल के सवाल पर वेंकटेश ने कहा, "हमें राजनीति में क्यों पड़ना चाहिए? मंत्री ने खुद कहा है कि हम टेबल पर बैठकर चर्चा करें। जब बातचीत का रास्ता खुला है तो हड़ताल की क्या जरूरत?"

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री ने ट्रेड यूनियनों को बैठक के लिए बुलाया था, लेकिन कुछ यूनियनें बैठक से बाहर चली गईं।

वेंकटेश ने दावा किया कि सभी सेक्टर हड़ताल में शामिल नहीं होंगे। उनके अनुसार कई सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और निजी उद्योग हड़ताल में भाग नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि कुछ मजदूर जरूर हड़ताल में जाएंगे, खासकर वामपंथी दलों से जुड़े संगठन, लेकिन व्यापक समर्थन नहीं मिलेगा।

उधर, संयुक्त केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने गुरुवार को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इन संगठनों का दावा है कि केंद्र की नीतियां मजदूर विरोधी हैं। गुरुवार को बुलाए गए भारत बंद से बैंकिंग, बीमा, बिजली, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा, गैस और जल आपूर्ति जैसी सेवाओं पर आंशिक असर पड़ सकता है।
 

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