बांग्लादेश: जमात का महिला सशक्तिकरण का मुखौटा बेनकाब, वादों के पीछे है महिलाओं को अधीन रखने की सोच

बांग्लादेश: महिला सशक्तिकरण पर जमात के वादों के पीछे छिपा रूढ़िवादी रुख


माले, 11 फरवरी। बांग्लादेश की कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के हालिया बयान और चुनावी घोषणापत्र में महिलाओं के प्रति समावेशी और सुरक्षात्मक छवि पेश की गई है, लेकिन उसकी लंबे समय से चली आ रही रूढ़िवादी सोच में कोई वास्तविक बदलाव नहीं दिखता। एक रिपोर्ट में बुधवार को यह दावा किया गया।

‘मालदीव्स इनसाइट’ की रिपोर्ट के अनुसार, जमात महिलाओं को प्रतिनिधित्व और सुरक्षा देने का वादा तो करती है, लेकिन नेतृत्व पदों पर महिलाओं की अनुपस्थिति, चुनाव में किसी भी महिला उम्मीदवार को मैदान में न उतारना और महिलाओं को घरेलू दायरे तक सीमित रखने वाली बयानबाजी उसके दावों को कमजोर करती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि शरीयत कानूनों पर जमात का अस्पष्ट रुख भी इस बात का संकेत देता है कि महिलाओं को लेकर उसकी सोच अब भी अलगाव और अधीनता पर आधारित है, न कि वास्तविक सशक्तिकरण पर।

रिपोर्ट के अनुसार, “इस्लामी आंदोलनों में महिला सशक्तिकरण का सवाल हमेशा विरोधाभासों से भरा रहा है और बांग्लादेश की जमात-ए-इस्लामी इसका एक स्पष्ट उदाहरण है। सतह पर पार्टी का हालिया चुनावी घोषणापत्र समावेशिता की बात करता है और सरकार में महिलाओं, जातीय व धार्मिक अल्पसंख्यकों को प्रतिनिधित्व देने का वादा करता है। लेकिन पार्टी के पुराने रुख और व्यवहार के संदर्भ में देखें तो ये वादे वास्तविक लैंगिक समानता के बजाय प्रतीकात्मक कदम ज्यादा लगते हैं।”

रिपोर्ट में बताया गया कि चुनावी सभाओं में जमात के अमीर शफीकुर रहमान ने बार-बार महिलाओं की “सुरक्षा और गरिमा” को प्राथमिकता बताया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि महिलाएं “घर, सड़क, कार्यस्थल और हर जगह सुरक्षित रहेंगी।” घोषणापत्र में सुरक्षित कार्य वातावरण, मातृत्व के दौरान कम कार्य समय, महिलाओं के लिए विशेष बस सेवाएं, सीसीटीवी कैमरे और आपातकालीन हेल्पलाइन जैसी घोषणाएं भी शामिल हैं।

हालांकि, रिपोर्ट का कहना है कि ये वादे सशक्तिकरण की बजाय संरक्षण पर अधिक जोर देते हैं, जिससे यह धारणा मजबूत होती है कि महिलाओं को सक्रिय सार्वजनिक भागीदारी के बजाय संरक्षित किए जाने वाले कमजोर वर्ग के रूप में देखा जा रहा है।

रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया कि आगामी चुनाव में जमात-ए-इस्लामी ने एक भी महिला उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया है। इससे मंत्रिमंडल में महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के दावे पर सवाल खड़े होते हैं। पार्टी नेतृत्व ने यह भी स्पष्ट किया है कि महिलाएं सर्वोच्च पदों पर नहीं आ सकतीं।
 

Latest Replies

Forum statistics

Threads
16,623
Messages
16,660
Members
20
Latest member
7519202689
Back
Top