चुनौतियों से जूझते मछुआरों को मिलेगी नई दिशा! पुडुचेरी में उपराज्यपाल करेंगे दो दिवसीय मत्स्य कार्यशाला का उद्घाटन

पुडुचेरी में दो दिवसीय मत्स्य कार्यशाला का उद्घाटन करेंगे उपराज्यपाल कैलाशनाथन


पुडुचेरी, 11 फरवरी। पुडुचेरी में बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में समुद्री मत्स्य मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन गुरुवार को होटल अकोर्ड में इस दो दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन करेंगे।

यह उच्चस्तरीय कार्यशाला ऐसे समय आयोजित हो रही है जब समुद्री मत्स्य क्षेत्र कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। इनमें जलवायु परिवर्तन, बंगाल की खाड़ी में चक्रवातों की बढ़ती आवृत्ति, मछलियों के प्रवासन पैटर्न में बदलाव और तटीय संसाधनों पर बढ़ता दबाव शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन परिस्थितियों का सीधा असर हजारों छोटे मछुआरों और तटीय समुदायों की आजीविका पर पड़ा है, जिससे टिकाऊ और दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य समुद्री मत्स्य मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ बनाकर मछुआरों की आय सुरक्षा सुनिश्चित करना, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना और अधिक लचीली एवं टिकाऊ ‘ब्लू इकोनॉमी’ का निर्माण करना है।

विचार-विमर्श के दौरान प्रसंस्करण प्रणालियों के आधुनिकीकरण, कोल्ड-चेन अवसंरचना में सुधार, बाजार संपर्क को मजबूत करने और जलवायु-अनुकूल प्रथाओं को अपनाने जैसे मुद्दों पर रणनीतियों पर चर्चा की जाएगी, ताकि इस क्षेत्र के दीर्घकालिक भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।

पुडुचेरी को मेजबान स्थल के रूप में रणनीतिक रूप से चुना गया है, क्योंकि यहां समुद्री मत्स्य गतिविधियां सक्रिय हैं और प्रसंस्करण अवसंरचना अच्छी तरह विकसित है। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के प्रमुख मत्स्य केंद्रों के निकट होने के साथ-साथ प्रभावी प्रशासनिक ढांचे के कारण यह केंद्र बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में दोहराए जा सकने वाले नीति और तकनीकी हस्तक्षेपों के परीक्षण के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।

इस कार्यशाला में नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के विशेषज्ञों के शामिल होने की उम्मीद है, जो विचारों और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करेंगे।

मुख्यमंत्री एन. रंगासामी और मत्स्य मंत्री के. लक्ष्मीनारायणन भी कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसके अलावा भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।

खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ), बे ऑफ बंगाल प्रोग्राम इंटर-गवर्नमेंटल ऑर्गेनाइजेशन (बीओबीपी-आईजीओ) जैसे वैश्विक और क्षेत्रीय निकायों के प्रतिनिधि, प्रमुख अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञ तथा समुद्री खाद्य उद्योग से जुड़े हितधारक भी इस दो दिवसीय विचार-विमर्श में शामिल होंगे।

आयोजकों के अनुसार, कार्यशाला से ऐसे व्यावहारिक सुझाव निकलने की उम्मीद है, जो टिकाऊ विकास को बढ़ावा देंगे, मछुआरों की आय में वृद्धि करेंगे और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के तटीय समुदायों की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करेंगे।
 
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