नई दिल्ली, 11 फरवरी। दिल्ली सरकार ने दिल्ली के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में हाई टेंशन (एचटी) एवं लो टेंशन (एलटी) बिजली लाइनों की शिफ्टिंग और भूमिगत करने के प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है।
दिल्ली सरकार का यह ऐतिहासिक निर्णय दिल्ली में सार्वजनिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने, बिजली वितरण प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाने तथा दिल्ली की सुंदरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने इस ऐतिहासिक निर्णय के बारे में विस्तार से बताया कि दिल्ली सरकार के इस निर्णय का उद्देश्य रिहायशी एवं घनी आबादी वाले इलाकों से गुजर रही असुरक्षित ओवरहेड बिजली लाइनों को भूमिगत करना है, ताकि मानव जीवन पर मंडरा रहे खतरों को कम किया जा सके और एक सुरक्षित एवं बेहतर बिजली वितरण प्रणाली सुनिश्चित की जा सके। इस पूरे काम पर अब तक लगभग 463 करोड़ की धनराशि की योजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं।
सूद ने यह भी बताया कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जनता की सुरक्षा को देखते हुए यह ऐतिहासिक निर्णय लेकर दिल्ली के कुछ स्थानों में एचटी और एलटी लाइनों के शिफ्टिंग और भूमिगत करने संबंधी प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की है।
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि दिल्ली सरकार के इस निर्णय के अनुसार, इस कार्य में दिल्ली के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों की 125 बस्तियों और स्थानीय क्षेत्र में 267,20,15,813 रुपए अनुमानित व्यय होगा। साथ ही चांदनी चौक क्षेत्र की 26 सड़कों और मार्गों पर लगभग 159.47 करोड़ रुपए का अनुमानित व्यय होगा। पायलट परियोजना के रूप में बीएच ब्लॉक, शालीमार बाग और सी-4 ईस्ट ब्लॉक, जनकपुरी में ओवरहेड वायर्स को भूमिगत करने का काम सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। यह मॉडल भविष्य में अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा। इसके अतिरिक्त वर्ष 2025 में भी ओवरहेड लाइन को भूमिगत करने के लिए 15 प्रस्तावों के लिए 37.63 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई थी।
सूद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार राजधानी में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, बिजली के तंत्र को सुदृढ़ करने और दिल्ली को एक सुरक्षित, स्वच्छ, आधुनिक एवं ऊर्जा-स्मार्ट शहर के रूप में विकसित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। दिल्ली सरकार की स्वीकृत यह परियोजनाएं सरकार की जनप्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। हमारा लक्ष्य है कि दिल्ली में बिजली आपूर्ति अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और आधुनिक बने।
ऊर्जा मंत्री ने यह भी बताया कि दिल्ली सरकार ने जब से कमान संभाली है, तब से दिल्ली की बिजली व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन किए हैं। दिल्ली के लोगों को 24 घंटे बिजली मिले, इसके लिए कई स्तरों पर नई और आधुनिक तकनीक से काम किया जा रहा है। आगामी गर्मियों के मौसम को देखते हुए दिल्ली सरकार ने समर एक्शन प्लान के अंतर्गत दिल्ली की बिजली व्यवस्था के पूरे सिस्टम का आकलन कर उसमें सुधार के लिए कई निर्णय भी लिए हैं।
सूद ने यह भी बताया कि भारत सरकार द्वारा दिल्ली में एसएएससीआई (स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट फॉर कैपिटल इनवेस्टमेंट) योजना के अंतर्गत एचटी/एलटी लाइनों के शिफ्टिंग से संबंधित 13 प्रस्तावों के लिए लगभग 109 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। इन कार्यों के पूर्ण होने से घनी आबादी वाले क्षेत्रों में असुरक्षित बिजली के तारों से होने वाली दुर्घटनाओं में कमी आएगी और नागरिकों को सुरक्षित वातावरण भी उपलब्ध होगा।
ऊर्जा मंत्री ने आगे बताया कि दिल्ली सरकार ने वर्ष 2030 तक के लिए दिल्ली पावर सिस्टम का एक व्यापक मास्टर प्लान भी तैयार किया है, जिसे सभी संबंधित एजेंसियों के समन्वय से लागू किया जाएगा। इस रोडमैप के तहत लगभग 17,000 करोड़ रुपए का पूंजी निवेश अगले तीन वर्षों में दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड और डिस्कॉम के माध्यम से किया जाएगा। इसका उद्देश्य वर्तमान ग्रिड को अपग्रेड करना, नए ग्रिड लगाना, बिजली की निरंतर और सुरक्षित आपूर्ति तथा बढ़ती बिजली मांग और इलेक्ट्रिक वाहनों को ध्यान में रखते हुए बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
ऊर्जा मंत्री ने यह भी बताया कि दिल्ली सरकार का यह निर्णय केवल बिजली लाइनों के स्थानान्तरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों की सुरक्षा और आधुनिक अवसंरचना की दिशा में एक ठोस कदम है। वर्षों से आवासीय और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में लटकी हुई एचटी/एलटी बिजली लाइनें दुर्घटनाओं का कारण बनती रही हैं। अब इन जोखिमपूर्ण ओवरहेड लाइनों को हटाकर हम न केवल संभावित हादसों को रोके सकेंगे, बल्कि दिल्ली को एक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुंदर राजधानी बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।