'सर्वोच्च न्यायालय' नाम की मांग पर हाईकोर्ट का DMRC से सवाल: जब सबका अनुवाद, तो इसका क्यों नहीं?

सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन का हिंदी नाम ‘सर्वोच्च न्यायालय’ करने की मांग पर दिल्ली हाईकोर्ट ने डीएमआरसी से मांगा जवाब


नई दिल्ली, 11 फरवरी। दिल्ली हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन के हिंदी नाम को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) से जवाब मांगा है।

याचिका में मांग की गई है कि 'सुप्रीम कोर्ट' मेट्रो स्टेशन का हिंदी नाम बदलकर 'सर्वोच्च न्यायालय' किया जाए। सुनवाई के दौरान अदालत ने डीएमआरसी से पूछा कि जब अन्य मेट्रो स्टेशनों के नामों का हिंदी अनुवाद किया गया है तो सुप्रीम कोर्ट स्टेशन के मामले में ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने उदाहरण देते हुए कहा कि 'दिल्ली यूनिवर्सिटी' मेट्रो स्टेशन का हिंदी नाम 'विश्वविद्यालय' है और 'सेंट्रल सेक्रेटेरिएट' का हिंदी नाम 'केंद्रीय सचिवालय' रखा गया है। ऐसे में 'सुप्रीम कोर्ट' स्टेशन का हिंदी नाम 'सर्वोच्च न्यायालय' रखने में क्या दिक्कत है, इस पर स्पष्टीकरण मांगा गया।

हाईकोर्ट ने डीएमआरसी के वकील को निर्देश दिया कि वह इस मुद्दे पर संबंधित अधिकारियों से स्पष्ट निर्देश लेकर अगली सुनवाई पर अदालत को अवगत कराएं। अदालत ने कहा कि इस मामले में नीतिगत निर्णय और व्यावहारिक पक्ष को ध्यान में रखते हुए जवाब दिया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता का कहना है कि देश की सर्वोच्च अदालत का नाम हिंदी में 'सर्वोच्च न्यायालय' है, इसलिए मेट्रो स्टेशन पर भी यही नाम प्रदर्शित किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि इससे हिंदी भाषा को बढ़ावा मिलेगा और नामकरण में एकरूपता बनी रहेगी।

दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को तय की है। उस दिन डीएमआरसी की ओर से इस विषय पर आधिकारिक जवाब पेश किया जाएगा। अदालत के निर्देश के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि डीएमआरसी इस मांग पर क्या रुख अपनाता है और क्या स्टेशन के हिंदी नाम में बदलाव किया जाता है या नहीं।
 

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