बंगाल फायरवर्क्स एसोसिएशन ने सीएम ममता से इको-फ्रेंडली पटाखों की 'खतरनाक' ट्रेनिंग रोकने के लिए दखल की मांग की

बंगाल फायरवर्क्स एसोसिएशन ने सीएम ममता से इको-फ्रेंडली पटाखों की 'खतरनाक' ट्रेनिंग रोकने के लिए दखल की मांग की


कोलकाता, 11 फरवरी। सारा बांग्ला आतिशबाजी उन्नयन समिति (ऑल बंगाल फायरवर्क्स डेवलपमेंट एसोसिएशन) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक पत्र लिखा, जिसमें इको-फ्रेंडली पटाखे बनाने के नाम पर दी जा रही 'खतरनाक' ट्रेनिंग को लेकर चिंता जताई गई है। यह जानकारी सूत्रों ने बुधवार को दी।

पत्र की एक प्रति राज्य की चीफ सेक्रेटरी नंदिनी चक्रवर्ती और स्मॉल एंड कॉटेज इंडस्ट्रीज विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को भी भेजी गई है। एसोसिएशन ने मंगलवार को लिखे पत्र में तुरंत प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग की है।

एसोसिएशन के चेयरमैन बाबला रॉय ने आरोप लगाया कि ‘एनवायरनमेंट फ्रेंडली पटाखों’ की ट्रेनिंग के नाम पर साउथ 24 परगना जिले के बैज बज इलाके में 'कोल्ड पायरो' नाम के कुछ गैर-कानूनी और खतरनाक पटाखे बनाना सिखाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ये उत्पाद असल में पटाखों के दायरे में नहीं आते और इन्हें बनाने में ‘नाइट्रोसेल्यूलोज’ और ‘एमिल परक्लोरेट’ जैसे उच्च जोखिम वाले रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ये सभी रसायन पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन से अप्रूव्ड नहीं हैं और बैन लिस्ट में शामिल हैं।

पत्र में आगे बताया गया है कि अगर बिना लाइसेंस और बिना ट्रेनिंग वाले लोगों को ऐसी ट्रेनिंग दी जाती है तो स्थिति प्रशासन के नियंत्रण से बाहर हो सकती है। यदि पटाखे बनाने की यह खतरनाक ट्रेनिंग फैलती है तो इसे नियंत्रित करना मुश्किल होगा और इसका परिणाम भयानक हादसे और लोगों की मौत हो सकती है।

पत्र में हाल ही में आनंदपुर में हुई आग की घटना का भी जिक्र किया गया है, जिसमें 27 लोगों की जान गई थी। एसोसिएशन ने दावा किया कि उस हादसे का कारण घटिया, बिना अनुमति और बैन किए गए कच्चे माल का इस्तेमाल था।

ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पत्र में यह मांग की गई है कि पटाखे बनाने वाली कंपनियों को फॉरेस्ट और एनवायरनमेंट मिनिस्ट्री तथा नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड ऑफ टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज से अप्रूव्ड लैबोरेटरी से कच्चे माल की क्वालिटी टेस्ट रिपोर्ट और उससे जुड़े इनवॉइस संभालकर रखने चाहिए। एसोसिएशन का मानना है कि इससे किसी भी हादसे के बाद वास्तविक वजह का पता लगाना आसान हो जाएगा।
 
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