वंदे मातरम निर्देश पर भड़की सियासत! विपक्ष ने सरकार की मंशा पर उठाए गंभीर सवाल, धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा भी उछला

वंदे मातरम’ को लेकर सियासी घमासान तेज, विपक्ष ने उठाया सरकार की मंशा पर सवाल


नई दिल्ली, 11 फरवरी। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से 'वंदे मातरम' को लेकर जारी निर्देश पर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इस मुद्दे पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "वंदे मातरम को लागू कराने में कांग्रेस की ऐतिहासिक भूमिका रही है। भाजपा की शुरू से सबकी चीजें छीनने की आदत गलत है। वंदे मातरम के प्रति सबसे बड़ी भक्ति कांग्रेस की है। इस मुद्दे पर भाजपा राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।"

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला देते हुए कहा कि वंदे मातरम पहले से ही पढ़ा जाता है, लेकिन सभी छह छंदों को पढ़ने की अनिवार्यता पर उन्हें आपत्ति है। अगर मुझसे कहा जाएगा कि मैं सभी छह छंद पढ़ूं, तो मैं नहीं पढ़ पाऊंगा, क्योंकि मेरा धर्म इसकी इजाजत नहीं देता। मैं यहीं सजदा करूंगा, इसमें कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन, संविधान मुझे अपने धर्म को अपने तरीके से मानने की आजादी देता है। किसी के भी साथ किसी भी प्रकार की जबरदस्ती संविधान की भावना के खिलाफ है।

इसी क्रम में इमरान मसूद ने संसद में राहुल गांधी के बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब राहुल गांधी ने डेटा को प्रमाणित करने की बात कही तो उन्हें रोका गया, लेकिन बाद में उन्होंने इंडिया-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। सरकार के पास इन सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं है और विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।

इस बीच, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान पर भी विपक्ष ने प्रतिक्रिया दी। राजीव शुक्ला ने कहा कि विपक्षी सांसद अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं करते और स्पीकर के समक्ष अपनी बात रखना बदतमीजी नहीं है। विपक्ष पर टिप्पणी करने से पहले सोच-विचार करना चाहिए।

कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने संसद की कार्यवाही और स्पीकर की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्थिति को टाला जा सकता था। उनके अनुसार, यदि स्पीकर हस्तक्षेप करते और विपक्षी नेताओं को बोलने का अवसर दिया जाता तो अविश्वास प्रस्ताव की नौबत नहीं आती। उन्होंने कहा कि विपक्ष के साथ कथित अन्याय के चलते उन्हें सामूहिक रूप से रुख अपनाना पड़ा।
 

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