शिवपाल यादव का यूपी के 'कागजी' बजट पर तंज: कहा 'सपनों का अमृत' मुबारक हो, विकास विज्ञापनों तक सीमित

उत्तर प्रदेश का 'कागजी' बजट मुबारक हो: शिवपाल सिंह यादव


लखनऊ, 11 फरवरी। उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश किए गए राज्य सरकार के आम बजट पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'कागजी' और 'दिशाहीन' बजट करार दिया। सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने जहां बजट को 'सपनों का अमृत' बताकर तंज कसा, वहीं कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने इसे किसान, युवा और आमजन विरोधी बताया।

सपा के वरिष्ठ नेता और विधायक शिवपाल सिंह यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि उत्तर प्रदेश का 'कागजी' बजट मुबारक हो। यूपी की जनता को एक बार फिर 'सपनों का अमृत' पिलाया गया है। विकास केवल विज्ञापनों में दौड़ रहा है और हकीकत की सड़कों पर गड्ढे आज भी अपनी गिनती का इंतजार कर रहे हैं। बेरोजगारों की डिग्रियां अलमारी में हैं और सरकार का डेटा फाइलों में मुस्कुरा रहा है।

उन्होंने कहा कि कमाल की जादूगरी है, आंकड़ों का अंबार है, मगर गरीब की थाली में अब भी हाहाकार है। जुमलों की खेती लहलहाई, कागज हुए हरे-भरे, नौकरी मांगो तो कहते हैं- 'तुम आत्मनिर्भर क्यों नहीं रहे?' महंगाई के पंख लगे हैं, छू रहे हैं आसमान, पर सरकार कह रही- 'सब चंगा, खुश है किसान। यह बजट नहीं, बस एक और 'इवेंट' की तैयारी है। जनता जानती है अब किसकी जाने की बारी है।

उधर, कांग्रेस नेता आराधना मिश्रा मोना ने बजट को 'पूरी तरह सूखा और निराशाजनक' करार दिया। उन्होंने कहा कि 9 लाख 12 हजार करोड़ रुपए के बजट में नई योजनाओं के लिए मात्र 43 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो कुल बजट का पांच प्रतिशत भी नहीं है। इतने बड़े बजट में नई योजनाओं की हिस्सेदारी बेहद कम है। यह सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी है।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि बजट में किसानों के लिए कोई ठोस नई योजना नहीं है। डीएपी-यूरिया की किल्लत, बढ़ती लागत और घटती आय के बावजूद कृषि क्षेत्र के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं किए गए। उन्होंने दावा किया कि कृषि विकास दर में गिरावट आई है और किसानों की आय दोगुनी करने का वादा जुमला साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के न्यूनतम मानदेय के लिए कोई बजटीय प्रावधान नहीं है। साथ ही उच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप अनुदेशकों के बढ़े मानदेय और एरियर के लिए भी बजट में राशि आवंटित नहीं की गई।

यह युवाओं और शिक्षकों के साथ धोखा है, आराधना मिश्रा ने पूर्वांचल और बुंदेलखंड के पिछड़े जिलों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि इन क्षेत्रों के लिए विशेष पैकेज का अभाव निराशाजनक है। उन्होंने वित्तीय घाटे को लेकर भी सवाल उठाए और आशंका जताई कि सरकार राजस्व बढ़ाने के नाम पर जनता पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है। दोनों दलों ने दावा किया कि यह सरकार का 'विदाई बजट' है और जनता 2027 में इसका जवाब देगी।
 
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