बंगाल 2026: मोयना विधानसभा का सियासी सफर, वाम गढ़ से भाजपा उभार तक; डेल्टा के ग्रामीण वोटर बनेंगे किंगमेकर

मोयना 2026 चुनाव: वाम दबदबे से भाजपा उभार तक, उपजाऊ डेल्टा क्षेत्र में ग्रामीण मतदाताओं की भूमिका अहम


नई दिल्ली, 10 फरवरी। मोयना विधानसभा क्षेत्र पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण ग्रामीण सीट है, जो राजनीतिक रूप से बदलते समीकरणों का गवाह रही है। तमलुक लोकसभा सीट के सात विधानसभा क्षेत्रों में से एक मोयना सामान्य श्रेणी का है, जिसमें मोयना कम्युनिटी डेवलपमेंट ब्लॉक के साथ तमलुक ब्लॉक की पांच ग्राम पंचायतें शामिल हैं।

1951 में स्थापित इस सीट ने पश्चिम बंगाल के सभी 17 विधानसभा चुनावों में भाग लिया। शुरुआती दशकों में मोयना में वामपंथी दलों का दबदबा रहा, जिसमें सीपीआई(एम) ने छह बार और सीपीआई ने पांच बार जीत हासिल की। वहीं, कांग्रेस को तीन जीत मिलीं। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने 2011 में पहली बार यहां जीत दर्ज की, जब भूषण चंद्र डोलाई ने सीपीआई(एम) के शेख मुजीबुर रहमान को 9,957 वोटों से हराया। 2016 में डोलाई ने कांग्रेस के मानिक भौमिक को 12,124 वोटों से हराकर सीट बरकरार रखी।

लेकिन 2021 में बड़ा उलटफेर हुआ। भाजपा के उम्मीदवार अशोक डिंडा, जो पूर्व भारतीय क्रिकेटर हैं, ने टीएमसी के संग्राम कुमार दोलुई को मात्र 1,260 वोटों से हराकर सीट जीती। 2011 में भाजपा को सिर्फ 2.59 प्रतिशत और 2016 में 3.24 प्रतिशत वोट मिले थे, लेकिन 2021 में पार्टी ने यहां मजबूत पकड़ बनाई।

लोकसभा स्तर पर भी मोयना के रुझान दिलचस्प हैं। तमलुक लोकसभा में टीएमसी 2009 में सीपीआई(एम) से 16,912 वोटों और 2014 में 39,803 वोटों से आगे रही। भाजपा का वोट शेयर 2009 में 1.53 प्रतिशत और 2014 में 4.64 प्रतिशत था, जो 2019 में 42.70 प्रतिशत तक पहुंचा। 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने टीएमसी पर 9,948 वोटों की बढ़त बनाई, जो क्षेत्र में भाजपा की बढ़ती ताकत दिखाता है।

2024 में मोयना में कुल 2,68,091 मतदाता थे, जो 2011 के 1,96,999 से काफी बढ़े हैं। अगर विधानसभा सीट के वोटिंग प्रतिशत की बात करें, तो यह हमेशा ऊंचा रहता है। सीट पर 2011 में 90.67 प्रतिशत, 2016 में 87.40 प्रतिशत और 2021 में 88.09 प्रतिशत वोट दर्ज किया गया। लोकसभा में यह थोड़ा कम रहा। जो 2019 में 85.16 प्रतिशत और 2024 में 84.04 प्रतिशत दर्ज किया गया।

जनसांख्यिकी के लिहाज से अनुसूचित जाति सबसे बड़ा समूह (22.15 प्रतिशत) है, उसके बाद मुस्लिम (11.10 प्रतिशत)। यह सीट मुख्य रूप से ग्रामीण हैं, जहां पर करीब 95 प्रतिशत मतदाता गांवों में और सिर्फ करीब 5 प्रतिशत शहरी इलाकों में हैं।

मोयना का इतिहास मोयनगढ़ किले से जुड़ा है, जो प्राचीन ताम्रलिप्त बंदरगाह के निकट स्थित था। यह किला गोलाकार खाई, टीलों और घने जंगलों से घिरा था, जिससे दुश्मनों के लिए हमला मुश्किल था। स्थानीय परंपराएं इसे धर्ममंगल के राजा लाउसेन और 16वीं शताब्दी के बाहुबलिंद्र शाही परिवार से जोड़ती हैं, जिन्होंने यहां राजधानी बनाई और बंगाल सुल्तानों के हमलों का मुकाबला किया। किले के अवशेष, मंदिर, दरगाह और खाई आज भी मोयना के गौरवशाली अतीत की याद दिलाते हैं।

भौगोलिक रूप से मोयना ऊपरी गंगा-जमुना मैदान और पूर्वी तटीय डेल्टा में है, जहां हल्दी, रूपनारायण, रसूलपुर, बागूई और केलेघाई नदियां बहती हैं। उपजाऊ जमीन पर धान मुख्य फसल है, साथ ही दालें, तिलहन और सब्जियां उगाई जाती हैं। ज्वार की बाढ़ और चक्रवात आम हैं, लेकिन तटबंध और नहरें मदद करती हैं। मछली पालन यहां की अर्थव्यवस्था का मजबूत हिस्सा है, जो हजारों को रोजगार देता है।

सड़क और रेल से मोयना तमलुक (17 किमी पूर्व), कोलाघाट (19 किमी उत्तर) से जुड़ा है। कोलकाता करीब 90-96 किमी दूर है। पांशकुड़ा 13 किमी, हल्दिया 46 किमी और खड़गपुर 51 किमी दूरी पर हैं।

सीट पर अब भाजपा (2021 विधानसभा और 2024 लोकसभा में मजबूत) और टीएमसी के बीच सीधी लड़ाई दिख रही है। टीएमसी सीट वापस जीतने की कोशिश करेगी, जबकि भाजपा अपनी बढ़त बनाए रखना चाहेगी।
 

Similar threads

Latest Replies

Forum statistics

Threads
5,707
Messages
5,739
Members
18
Latest member
neodermatologist
Back
Top