बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर टीडीपी गंभीर: केंद्र से की सोशल मीडिया पर उम्र-आधारित नियमन की जोरदार मांग

सोशल मीडिया के लिए उम्र-आधारित नियमन पर विचार करे केंद्र: टीडीपी


अमरावती, 10 फरवरी। तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने केंद्र सरकार से सोशल मीडिया के लिए उम्र-आधारित नियमन पर विचार करने का आग्रह किया है, ताकि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

टीडीपी संसदीय दल के नेता लावु श्रीकृष्ण देवरायलु ने मंगलवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उम्र-आधारित नियमन पर नीति स्तर पर विचार-विमर्श की मांग की।

उन्होंने सुझाव दिया कि इस विषय पर अध्ययन के लिए एक समर्पित समिति या विशेषज्ञ समूह का गठन किया जाए, जो उम्र-आधारित नियमन से जुड़े पहलुओं का अध्ययन कर एक व्यापक राष्ट्रीय नीति की सिफारिश कर सके।

टीडीपी सांसद ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि आंध्र प्रदेश में एनडीए सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रही है और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचे की संभावनाएं तलाश रही है।

देवरायलु ने याद दिलाया कि उन्होंने सोशल मीडिया (उम्र प्रतिबंध और ऑनलाइन सुरक्षा) से जुड़ा एक निजी सदस्य विधेयक पेश किया था। इस विधेयक में सोशल मीडिया के उपयोग के लिए न्यूनतम उम्र सीमा तय करने, अनिवार्य उम्र-सत्यापन व्यवस्था लागू करने और सत्यापन के दौरान एकत्र बच्चों के व्यक्तिगत डेटा को स्थायी रूप से हटाने का प्रावधान शामिल है। साथ ही नियमों के उल्लंघन पर कड़े दंड का भी प्रस्ताव है।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं की ओर ध्यान दिलाया। ज्ञापन में कहा गया है कि भारत में 14 से 16 वर्ष के लगभग 90 प्रतिशत बच्चों के पास घर पर स्मार्टफोन की पहुंच है और 75 प्रतिशत से अधिक बच्चे सक्रिय रूप से सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं, ज्यादातर मनोरंजन के लिए। अध्ययनों के अनुसार, 60 प्रतिशत से अधिक नाबालिग ऑनलाइन बुलिंग का शिकार हो चुके हैं, जबकि लगभग आधे बच्चे उम्र के लिहाज से अनुचित या हानिकारक सामग्री के संपर्क में आते हैं।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग किशोरों में चिंता, अवसाद और आत्म-हानि जैसी समस्याओं से जुड़ता जा रहा है, वहीं प्लेटफॉर्म पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना बच्चों के डेटा को एकत्र और व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं।

टीडीपी नेता ने हाल की कुछ दुखद घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि गाजियाबाद और लखनऊ जैसे मामलों में डिजिटल लत, साइबर बुलिंग और ऑनलाइन मानसिक तनाव के कारण नाबालिगों की जान जाना इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में भी युवाओं में बढ़ती डिजिटल लत को लेकर चेतावनी दी गई है और इसे मानसिक स्वास्थ्य व व्यवहारिक जोखिमों से जोड़ा गया है।

देवरायलु ने बताया कि कई देशों ने इस चुनौती से निपटने के लिए सख्त कानूनी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। ऑस्ट्रेलिया ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया है, जबकि डेनमार्क, मलेशिया, नॉर्वे, यूनाइटेड किंगडम और न्यूजीलैंड जैसे देश भी इसी तरह के उम्र-आधारित प्रतिबंधों पर विचार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह एक उभरती वैश्विक सहमति को दर्शाता है कि केवल पैरेंटल कंट्रोल पर्याप्त नहीं हैं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
 
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