मुंबई, 10 फरवरी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के मुसलमानों पर दिए गए एक बयान पर एआईएमआईएम के नेता वारिस पठान ने पलटवार करते हुए कहा कि वे मुसलमानों से नफरत करते हैं।
मुंबई में वारिस पठान ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की सोच निम्न स्तर की है। उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के लिए संविधान की शपथ ली है, लेकिन वे संविधान की धज्जियां उड़ा रहे हैं। आए दिन वे मुसलमानों के खिलाफ बेतुके और आपत्तिजनक बयान देते हैं। इससे साफ पता चलता है कि भारत के मुसलमानों के लिए उनके मन में कितनी नफरत भरी हुई है। पहले तो उन्होंने यह भी कहा था कि मुसलमानों को परेशान किया जाना चाहिए- जैसे अगर कोई ऑटो वाला आपसे पांच रुपये मांगे, तो उसे सिर्फ चार रुपये दे दो। आप कौन होते हैं हमारे नागरिकों के साथ ऐसा बर्ताव करने वाले? आप कुछ रुपयों के लिए लोगों को परेशान नहीं कर सकते।
वारिस पठान ने कहा कि एक वीडियो मुसलमानों के खिलाफ सामने आया, जिसे बाद में हटाया गया। यह किस तरह की मानसिकता है? यह हेट क्राइम है। सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए था। उन्हें गिरफ्तार करना चाहिए था। अगर किसी मुसलमान ने ऐसी हरकत की होती, तो उसे तुरंत जेल में डाल दिया जाता। असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। मुसलमानों को टारगेट करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वारिस पठान ने कहा कि हमने क्या कहा था कि डॉ बीआर अंबेडकर ने हमें संविधान दिया, जिसमें कोई भी व्यक्ति नेता बन सकता है। कोई भी गवर्नर, प्रेसिडेंट या देश का प्रधानमंत्री बन सकता है। चाहे वह हिंदू, मुस्लिम, सिख, या ईसाई हो। एक दिन हिजाब या बुर्का पहनने वाली कोई महिला हमारे देश की प्रधानमंत्री बन सकती है। इसमें गलत क्या है?
बीएमसी में भाजपा की मेयर कैंडिडेट रितु तावड़े के बांग्लादेशियों को बाहर करने वाले बयान पर वारिस पठान ने कहा कि उनकी प्राथमिकता क्या है? उनकी प्राथमिकता विकास, सड़कें या गड्ढों को ठीक करना नहीं है। जिस बुनियाद पर लोगों ने वोट दिया, उसे पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। उनकी असली प्राथमिकता नफरत और भेदभाव फैलाना लगती है। भाजपा के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए उन्हें बांग्लादेशी घुसपैठियों को निकालना ही मुद्दा लगता है। बरसात के दिनों में जलभराव हो जाता है, उसे कैसे ठीक करेंगी, वह प्लान होना चाहिए। वह तो अपने मुख्य मकसद से पूरी तरह भटक गई हैं।