नीट छात्रा हत्याकांड: प्रशांत किशोर बोले- बड़े लोग शामिल, न्याय मिलने तक जन सुराज का संघर्ष जारी रहेगा

नीट छात्रा की हत्या मामले में इंसाफ मिलने तक हमारा प्रयास जारी रहेगा: प्रशांत किशोर


मोतिहारी, 10 फरवरी। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने नीट छात्रा की हत्या मामले में कहा कि जब तक पीड़िता और उसके परिजनों को न्याय नहीं मिल जाता, हम लगातार प्रयासरत रहेंगे।

मोतिहारी में मीडिया से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि आपको पता होगा कि नीट मामले में सरकार का शुरुआती स्टैंड यह था कि लड़की के साथ कोई गलत काम नहीं हुआ है और उसने सुसाइड किया है। जब जन सुराज के कार्यकर्ताओं ने यह मुद्दा उठाया और जब मैं भी लड़की की मां से मिला, तभी सरकार ने एसआईटी गठित की। जन सुराज के दबाव के कारण पुलिस कर्मियों को निलंबित किया गया। इस मामले में बड़े लोग शामिल हैं। एक छात्रा के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में एसआईटी बनने के बावजूद मामला उलझता जा रहा है। पुलिस प्रशासन फेल हुआ, एसआईटी भी फेल हुई। इसके बाद अब इस पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है।

उन्होंने कहा कि पटना में जो हॉस्टल चल रहे हैं, उनकी कोई निगरानी व्यवस्था नहीं है। हर दूसरा घर हॉस्टल में बदल गया है। इन हॉस्टलों की निगरानी और नियमन के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाने चाहिए।

प्रशांत किशोर ने कहा कि लोकतंत्र के लिए जरूरी है कि विपक्ष के नेता को बोलने दिया जाए। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया जाता। वे कुछ बोल रहे होते हैं, तो बोलने दिया जाए। अगर स्पीकर को लगता है कि कुछ गलत है तो वे उसे हटा सकते हैं। लेकिन, बोलने से नहीं रोकना चाहिए। यह लोकतंत्र के लिए घातक है।

उन्होंने जन सुराज के भविष्य के कार्यक्रमों के बारे में बताया कि हम लोग विधानसभा चुनाव के बाद जन सुराज को पूरे बिहार में एक नए सिरे से संगठित करने का प्रयास करेंगे। मैं वर्तमान में हर जिले में एक-दो दिन बिता रहा हूं। जो लोग हमारे साथ जुड़े थे, उनसे बिहार के नवनिर्माण का स्वरूप कैसा होना चाहिए, इस पर उनकी राय ली जा रही है।

प्रशांत किशोर ने कहा कि जब हम ऐसी मीटिंग में जाते हैं, तो लोग अक्सर कहते हैं कि भाई, हम पब्लिक में नहीं बोलना चाहते। हम प्राइवेट में बोलना चाहते हैं। आपके पास दोनों विकल्प हैं। हम यहां बैठे हैं। टाइम लिमिट तय कर लें, एक घंटा, दो घंटे, तीन घंटे-जितना चाहें। जो पब्लिक में बोलना चाहते हैं, वे बोल सकते हैं। उसके बाद हम पूरे दिन यहीं रहेंगे और ब्लॉक-वाइज लोगों से मिलेंगे। वहां भी आप अपनी बात रख सकते हैं। अगर फिर भी बात न बने, तो आप लिखकर अपनी राय सब्मिट कर सकते हैं।
 

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