नई दिल्ली, 10 फरवरी। दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) और सरकार के बीच सियासी घमासान एक बार फिर तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी ने सरकार पर एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) के आंकड़ों में कथित हेरफेर करने का गंभीर आरोप लगाया है।
पार्टी का दावा है कि सरकार ने जानबूझकर दिल्ली के हरे-भरे, खुले और कम प्रदूषण वाले इलाकों में नए एक्यूआई मॉनिटरिंग स्टेशन स्थापित किए हैं, ताकि वास्तविक स्तर पर प्रदूषण कम किए बिना ही आंकड़ों को बेहतर दिखाया जा सके।
आप दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इस मुद्दे को लेकर सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार का उद्देश्य प्रदूषण से प्रभावी ढंग से निपटना नहीं, बल्कि जनता को गुमराह करने के लिए एक्यूआई डेटा में फर्जीवाड़ा करना है।
सौरभ भारद्वाज के मुताबिक, जब मॉनिटरिंग स्टेशन हरे-भरे और कम ट्रैफिक वाले इलाकों में लगाए जाएंगे, तो वहां प्रदूषण का स्तर स्वाभाविक रूप से कम रिकॉर्ड होगा, जिससे यह भ्रम पैदा होगा कि दिल्ली की हवा में सुधार आ रहा है।
भारद्वाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए दिल्ली सरकार पर सीधा निशाना साधा और इसे उनका “नया फर्जीवाड़ा” करार दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीक्यूएएम) इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए है।
आप नेता का कहना है कि आयोग में बैठे अधिकांश अधिकारी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त आईएएस अधिकारी हैं, जिस कारण यह संस्था निष्पक्ष रूप से कार्य नहीं कर रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “दिल्ली में आईएएस द्वारा आईएएस के लिए बनाया गया सिस्टम चल रहा है, जिसमें आम जनता की सेहत से समझौता किया जा रहा है।”
आम आदमी पार्टी ने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले अप्रैल महीने में भी सरकार ने इसी तरह हरे-भरे इलाकों में एक्यूआई मॉनिटरिंग स्टेशन लगाए थे, जिसका पार्टी ने कड़ा विरोध किया था। उस समय सौरभ भारद्वाज ने कहा था कि जिन स्थानों पर मॉनिटरिंग स्टेशन लगाए गए हैं, वहां न तो औद्योगिक गतिविधियां हैं, न भारी ट्रैफिक और न ही घनी आबादी।
उन्होंने सेंट्रल रिज, जेएनयू कैंपस, इग्नू के पीछे का जंगल, अक्षरधाम के पास यमुना का किनारा और एनएसआईटी कैंपस जैसे इलाकों का उदाहरण दिया था।
‘आप’ का आरोप है कि सरकार ने जानबूझकर इन स्थानों को चुना, ताकि प्रदूषण का स्तर कम दिखे और जनता को लगे कि हालात सुधर रहे हैं। पार्टी ने इसे दिल्लीवासियों के साथ धोखा बताते हुए मांग की है कि एक्यूआई मॉनिटरिंग स्टेशन वास्तविक प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों, जैसे औद्योगिक इलाके, व्यस्त सड़कें और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में लगाए जाएं, ताकि सही आंकड़े सामने आ सकें और वायु प्रदूषण से निपटने के लिए प्रभावी नीतियां बनाई जा सकें।