बीएमसी ने बड़े संपत्ति कर डिफाल्टरों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी जारी की

बीएमसी ने बड़े संपत्ति कर डिफाल्टरों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी जारी की


मुंबई, 10 फरवरी। बृहन्मुंबई नगर निगम ने उन बड़े संपत्ति कर डिफाल्टरों के खिलाफ चेतावनी जारी की है जो समय पर कर का भुगतान नहीं कर रहे हैं। अतिरिक्त नगर आयुक्त (नगर) डॉ. अश्विनी जोशी के निर्देश के अनुसार, यदि कर का भुगतान तुरंत नहीं किया गया, तो नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम ने धारा 203 के तहत उन संपत्ति मालिकों को सूचना जारी की है जो निर्धारित समय में कर भुगतान करने से बच रहे हैं और आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद देरी कर रहे हैं।

सूचना में स्पष्ट किया गया है कि यदि संपत्ति कर का भुगतान निर्धारित अवधि के भीतर नहीं किया गया, तो नगर निगम अधिनियम की धारा 204, 205 और 206 के तहत उक्त संपत्ति जब्त कर नीलाम की जाएगी। इसके साथ ही यह भी बताया गया कि अगर जब्त की गई संपत्ति से भी कर वसूली नहीं हो पाती है, तो संपत्ति को धारा 206 के तहत नीलाम किया जाएगा। नगर निगम के अनुसार, संपत्ति कर ही नगर निगम की आय का मुख्य स्रोत है और कर का भुगतान प्राप्त होने के 90 दिनों के भीतर जमा करना अनिवार्य है।

नगर निगम कर निर्धारण एवं संग्रह विभाग के अधिकारी सीधे संपत्ति मालिकों से संपर्क करके और विभिन्न माध्यमों से उन्हें जागरूक करके कर वसूली करते हैं। यदि इसके बाद भी कर का भुगतान नहीं होता, तो पहले ‘मांग पत्र’ जारी किया जाता है और फिर संपत्ति मालिक को 21 दिनों का अंतिम नोटिस दिया जाता है। इस अवधि के बाद, नगर निगम द्वारा संपत्ति की जब्ती और नीलामी जैसी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी जाती है।

नगर आयुक्त एवं प्रशासक भूषण गगरानी, अतिरिक्त नगर आयुक्त (नगर) डॉ. अश्विनी जोशी और संयुक्त आयुक्त (कर निर्धारण एवं संग्रह) विश्वास शंकरवार के मार्गदर्शन में मुंबई शहर और उपनगरों में संपत्ति कर संग्रह के लक्ष्य को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए विभिन्न माध्यमों से जनता में जागरूकता फैलाने और कर भुगतान की अपील की जा रही है। नागरिकों की सुविधा के लिए ऑनलाइन कर भुगतान की सुविधा भी उपलब्ध है, जिसकी जानकारी नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई है।

नगर निगम ने करदाताओं से अनुरोध किया है कि वे ऑनलाइन सुविधा का उपयोग करके समय पर संपत्ति कर का भुगतान करें। हालांकि, कुछ बड़े डिफाल्टरों ने समय-समय पर नोटिस मिलने के बावजूद कर का भुगतान नहीं किया है। ऐसे में नगर निगम ने उनके खिलाफ जब्ती नोटिस जारी किए हैं, जिनमें बकाया राशि के साथ जुर्माने की राशि भी शामिल है। नगर निगम अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, यदि कर का भुगतान नहीं किया जाता है, तो संबंधित संपत्तियों को नीलाम किया जाएगा।

9 फरवरी 2026 को संपत्ति कर भुगतान के लिए नगर निगम ने ‘शीर्ष बीस’ संपत्ति मालिकों से संपर्क किया। इनमें मेसर्स रघुवंशी मिल्स लिमिटेड, मेसर्स राजहंस एसोसिएट्स, मेसर्स आशापादरा डेवलपर्स, मेसर्स सुमेर बिल्टकॉर्प प्राइवेट लिमिटेड, श्री समीर एन भोजवानी, मेसर्स डीबीएस रियल्टी, मेसर्स अमीर पार्क्स एंड एम्यूजमेंट प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स एसडी कॉर्पोरेशन, एआर जाफर और मेसर्स गैलेक्सी कॉर्पोरेशन 10 प्लैनेट शामिल हैं। इन सभी पर करोड़ों रुपए का बकाया है, जो नगर निगम द्वारा वसूली की प्रक्रिया में हैं।

नगर निगम प्रशासन ने विशेष रूप से उन संपत्ति मालिकों से अपील की है, जिन्हें नोटिस भेजे गए हैं कि वे किसी भी कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए तुरंत कर का भुगतान करें। नगर निगम ने यह भी चेतावनी दी है कि कर का भुगतान न करने पर न केवल संपत्ति जब्त होगी, बल्कि इसे नीलाम करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाएगी।

नगर निगम का उद्देश्य केवल कर वसूली करना नहीं, बल्कि समय पर भुगतान के माध्यम से शहर और उपनगरों में विभिन्न विकास कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाना भी है। इसके लिए नागरिकों की समझ और सहयोग बेहद जरूरी है। नगर निगम ने इस संबंध में स्पष्ट किया है कि सभी करदाता ऑनलाइन माध्यम से आसानी से कर का भुगतान कर सकते हैं और किसी भी तरह की देरी से बच सकते हैं।
 

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