पटना, 10 फरवरी। बिहार की राजधानी पटना के एक छात्रावास में रहकर नीट की तैयारी कर रही छात्रा की मौत को लेकर मंगलवार को पटना की सड़कों पर जमकर प्रदर्शन किया गया। आइसा और ऐपवा के कार्यकर्ता पूर्व कार्यक्रम के मुताबिक विधानसभा मार्च के लिए सड़कों पर उतरे।
विभिन्न स्थानों पर पुलिस द्वारा बैरिकेडिंग कर उनके रोकने की कोशिश की गई। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर नोकझोंक हुई।
पूर्व घोषित कार्यक्रम के मुताबिक, दोपहर में बड़ी संख्या में ऐपवा और आइसा के कार्यकर्ता गांधी मैदान पहुंच गए और यहां से मार्च की शुरुआत हुई। यह मार्च जैसे ही जेपी गोलंबर पर पहुंचा, पुलिस द्वारा लगाए गए भारी बैरिकेड के पास रोक दिया गया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई।
प्रदर्शनकारी बैरिकेड को पार कर डाकबंगला चौराहे पर मोर्चा संभाला, जहां पहले से पुलिस बैरिकेड मौजूद था। प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री से मिलने और नीट छात्रा समेत बिहार की बेटियों के मामलों में न्याय की मांग कर रहे थे। बाद में डाकबंगला चौराहे पर बैठकर सभा आयोजित की गई।
आरोप है कि महिलाओं पर लाठीचार्ज किया गया। पुलिस कार्रवाई के कारण कई महिलाएँ घायल हो गईं। ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी ने कहा कि बिहार में छात्राओं और महिलाओं के खिलाफ लगातार गंभीर अपराध हो रहे हैं। नीट छात्रा का मामला, दरभंगा में छह साल की बच्ची के साथ बलात्कार और बक्सर की घटनाएं यह दिखाती हैं कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह विफल है। अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बजाय प्रशासन आंदोलनकारी महिलाओं पर बल प्रयोग कर रहा है।
उन्होंने कहा कि नीट छात्रा मामले में केवल सीबीआई जांच से न्याय सुनिश्चित नहीं होगा। इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के प्रत्यक्ष निर्देशन में होनी चाहिए। बिहार की महिलाएं अन्याय को स्वीकार नहीं करेंगी और न्याय मिलने तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
एमएलसी शशि यादव ने कहा कि विधानमंडल से लेकर सड़क तक सरकार इस मामले को दबाना चाहती है। सदन में मुख्यमंत्री महिला जनप्रतिनिधियों को अपमानित करते हैं और सड़क पर उनकी पुलिस दमन करती है।