राहुल गांधी का रवैया गांव के किसी जमींदार की तरह : गिरिराज सिंह

नेहरू और लेडी माउंटबेटन के रिश्ते पर गिरिराज सिंह ने उठाए सवाल, संसद में हुए हंगामे पर भी साधा निशाना


नई दिल्ली, 10 फरवरी। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मंगलवार को एक पोस्टर को लेकर पंडित जवाहर लाल नेहरू और लेडी माउंटबेटन के रिश्तों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह पोस्टर खुद बहुत कुछ बोल रहा है और देश के पहले प्रधानमंत्री के आचरण और फैसलों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

गिरिराज सिंह का कहना है कि नेहरू ने अपनी निजी आकांक्षाओं और इच्छाओं के चलते देश के सम्मान के साथ समझौता किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाकर देश के हितों को नुकसान पहुंचाया गया और पीओके जैसे मामलों को छेड़कर देश को कमजोर स्थिति में खड़ा किया गया। संयुक्त राष्ट्र संघ में कश्मीर का मुद्दा ले जाना एक बड़ी भूल थी, जिससे आज तक देश को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

गिरिराज सिंह ने यह भी दावा किया कि जब बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर चुनाव हार गए थे, उस समय नेहरू, लेडी माउंटबेटन के साथ खुशियां मना रहे थे। उन्होंने कहा कि यह सब बातें पोस्टर के जरिए सामने आ रही हैं और यह पोस्टर देशवासियों को सोचने पर मजबूर करता है कि किस तरह उस दौर में सत्ता में बैठे लोगों ने देश की गरिमा के साथ खिलवाड़ किया। उन्होंने इसकी तुलना वर्तमान प्रधानमंत्री से करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया में भारत का मान-सम्मान बढ़ाया है और देश को एक नई पहचान दिलाई है।

इसके साथ ही गिरिराज सिंह ने संसद में हुए हंगामे पर भी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जिस तरह से विपक्ष की महिला सांसदों ने सदन में व्यवहार किया, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था। उनका कहना है कि उस दिन महिला सांसद बैनर लेकर प्रधानमंत्री की मेज तक पहुंच गई थीं, जो संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।

गिरिराज सिंह ने बताया कि वह खुद उस समय सदन में मौजूद थे और उन्होंने हाथ जोड़कर महिला सांसदों को समझाने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि किरेन रिजिजू के वीडियो में भी साफ देखा जा सकता है कि वह हाथ जोड़कर महिला सांसदों से शांत रहने की अपील कर रहे थे, लेकिन उनके तेवर काफी आक्रामक थे।

उन्होंने आगे कहा कि लोकसभा स्पीकर ने भी इस घटना पर जो टिप्पणी की है, वह बिल्कुल सही है। स्पीकर को जो आशंका थी, वही उस समय के माहौल से झलक रही थी। गिरिराज सिंह का कहना है कि अगर उस वक्त प्रधानमंत्री सदन में मौजूद होते तो कोई अनहोनी भी हो सकती थी।

उन्होंने राहुल गांधी के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें राहुल गांधी ने कहा था कि प्रधानमंत्री डर गए हैं और इसलिए सदन में नहीं आ रहे हैं। इसके जवाब में गिरिराज सिंह ने कहा कि यह कहना बिल्कुल गलत है और विपक्ष जिस तरह की मांगें रख रहा है, वह तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है। गिरिराज सिंह ने कहा कि राहुल गांधी का रवैया ऐसा है, जैसे गांव का कोई जमींदार हुक्म दे रहा हो कि उसकी बात ही मानी जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसी जमींदार की देन नहीं होते, बल्कि देश की जनता उन्हें चुनती है। प्रधानमंत्री मोदी गरीब परिवार से आते हैं, पिछड़े वर्ग से आते हैं और यही बात विपक्ष को चुभती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि नेहरू खानदान की मानसिकता आज भी वही है और गरीब, पिछड़े वर्ग से आए व्यक्ति को प्रधानमंत्री के पद पर देखना उन्हें बर्दाश्त नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि संसद में काम नियमों और परंपराओं के अनुसार होता है। जो किताब अभी प्रकाशित भी नहीं हुई है, उस पर चर्चा की जिद करना और सदन को बाधित करना, कहां तक जायज है।
 
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