नई दिल्ली, 10 फरवरी। वैज्ञानिकों की एक टीम ने पता लगाया है कि क्रोनिक किडनी डिजीज और हार्ट फेलियर के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली एक दवा, समय से पहले ओवेरियन इनसफिशिएंसी के इलाज में भी असरदार है।
जापान की जुंटेंडो यूनिवर्सिटी और हांगकांग यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों की टीम का ये शोध मंगलवार को अमेरिकी जर्नल साइंस के इलेक्ट्रॉनिक एडिशन में प्रकाशित हुआ।
टीम को उम्मीद है कि इस खोज से इनफर्टिलिटी के इलाज में एक नई थेरेपी चलन में आएगी। द जापान टाइम्स को जुंटेंडो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर काज़ुहिरो कवामुरा ने कहा, "हम ओवरी स्टिमुलेशन को ऑप्टिमाइज करना चाहते हैं और ज्यादा असरदार दवाएं ढूंढना चाहते हैं।"
जिन महिलाओं को समय से पहले ओवेरियन इनसफिशिएंसी होती है, उनके पीरियड्स 40 साल की उम्र से पहले बंद हो जाते हैं। हालांकि इस स्थिति में ओवेरियन फाइब्रोसिस होता है, जो फॉलिकल ग्रोथ को रोकता है, लेकिन फाइनरेनोन नाम की दवा किडनी और हार्ट टिशू में फाइब्रोसिस को रोकती है।
एक क्लिनिकल ट्रायल में, टीम ने इस कंडीशन वाले मरीजों को फाइनरेनोन दिया, साथ ही ओवरी स्टिमुलेशन और ओवम मैचुरेशन के लिए दवाओं का भी इस्तेमाल किया। नतीजतन, इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) के जरिए एक फर्टिलाइज्ड अंडा मिला।
क्लिनिकल ट्रायल से पहले, टीम ने चूहों पर एक परीक्षण किया। जानना चाहा कि क्या फाइनरेनोन फॉलिकल ग्रोथ में मदद करता है। परीक्षण के नतीजों से पता चला कि जिन चूहों को दवा दी गई, उनके सामान्य से ज्यादा बच्चे पैदा हुए, और बच्चों में कोई असामान्यता नहीं थी।
2013 में, कावामुरा, जो उस समय सेंट मारियाना यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में एसोसिएट प्रोफेसर थे, ने "इन विट्रो एक्टिवेशन" नाम का एक इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट मेथड शुरू किया था।
यह मेथड, जो अब क्लिनिकल इस्तेमाल में है, लैप्रोस्कोपी के जरिए मरीज की ओवरी का एक हिस्सा इकट्ठा करता है, मेडिकल एजेंट से फॉलिकल्स को एक्टिवेट करता है, और उन्हें ओवेरियन मेम्ब्रेन के नीचे ट्रांसप्लांट करता है। हालांकि, इस प्रक्रिया के लिए जनरल एनेस्थीसिया की जरूरत होती है, जो मरीज के लिए ठीक नहीं है।
टीम ने इस मेथड जैसे ही असर वाली ओरल दवा की तलाश की। लगभग 1,300 दवाओं को टेस्ट करने के बाद फाइनरेनोन का सबसे सही ठहराया गया।