इंदौर, 10 फरवरी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंदौर सब-जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए इंदौर नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी राजेश परमार और उनके परिवार के नाम पर दर्ज 1.06 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (प्रोविजनल अटैच) कर लिया है। यह कार्रवाई राजेश परमार द्वारा अपने और परिवार के सदस्यों के नाम पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में की गई है।
ईडी द्वारा कुर्क की गई संपत्तियों में एक आवासीय मकान, कई प्लॉट, एक फ्लैट और कृषि भूमि शामिल हैं, जो राजेश परमार और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज हैं।
ईडी ने यह जांच भोपाल की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और धारा 13(1)(बी) सहपठित धारा 13(2) के तहत दर्ज किया गया था। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि राजेश परमार ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने और अपने परिजनों के नाम पर ऐसी संपत्तियां अर्जित कीं, जो उनकी ज्ञात आय के स्रोतों की तुलना में कहीं अधिक हैं।
जांच में सामने आया कि वर्ष 2007 से 2022 के बीच लगभग 1.66 करोड़ रुपए की संपत्तियां खरीदी गईं, जो उनकी ज्ञात आय से लगभग 175 प्रतिशत अधिक थीं। इस मामले में संदिग्ध अपराध की आय का मूल्य लगभग 1.21 करोड़ रुपए आंका गया है।
ईडी की जांच में पाया गया कि अवैध गतिविधियों से अर्जित धन का उपयोग सीधे अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया। इसके अलावा, राजेश परमार और उनके परिवार के बैंक खातों में बड़ी मात्रा में नकद जमा कराए गए, ताकि धन के वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके। बाद में इस रकम को बैंक ट्रांसफर के माध्यम से विभिन्न खातों में भेजकर संपत्ति खरीदने में उपयोग किया गया।
पीएमएलए के तहत पूछताछ के दौरान राजेश परमार संपत्तियों की खरीद के लिए उपयोग किए गए धन के वैध स्रोत के संबंध में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण या दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके। ईडी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है।