गुना, 10 फरवरी। केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' अभियान का असर अब जमीन पर साफ दिखाई देने लगा है। इसका ताजा उदाहरण मध्य प्रदेश के गुना जिले में देखने को मिला, जहां हस्तशिल्पियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से 'हस्तशिल्प प्रदर्शनी- 2026' का आयोजन किया गया है।
कपड़ा मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली के सहयोग से मध्य प्रदेश राज्य सहकारी संघ मर्यादित, भोपाल तथा विकास आयुक्त हस्तशिल्प द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी का शुभारंभ 9 फरवरी की रात लगभग 8:30 बजे प्रताप छात्रावास, गुना में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन गुना कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने किया। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक दुबे, अमित सहारे और सहायक निदेशक, हस्तशिल्प विकास आयुक्त सेवा केंद्र, ग्वालियर भी उपस्थित रहे।
इस प्रदर्शनी में देश के कई राज्यों से आए हस्तशिल्पियों ने अपने-अपने उत्पादों को प्रदर्शित किया है। हैदराबाद, जयपुर, दिल्ली, आगरा, बेंगलुरु, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, गुजरात सहित अन्य प्रदेशों के करीब 50 स्टॉल लगाए गए हैं। यहां जूट बैग, जरी वर्क, एम्ब्रॉयडरी, बांस शिल्प, हैदराबाद की प्रसिद्ध कलमकारी, बिहार की शिल्पकला, जयपुर की लटकन मीनाकारी, दिल्ली और आगरा की ज्वेलरी, देहरादून का कुशिया वर्क, बेंगलुरु की पेंटिंग, राजस्थान की क्ले और क्रॉकरी, उत्तर प्रदेश का टलाश वर्क, मध्य प्रदेश की दरी और बेडशीट, बीड वर्क, तोरण आर्ट, लेदर आर्ट, खजूर शिल्प, बुरहानपुर के लकड़ी के खिलौने तथा बनारस, जोधपुर, नागपुर, गुजरात और पश्चिम बंगाल के पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं।
प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने सभी स्टॉलों पर संबंधित कारीगरों और उनके राज्यों के नाम स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। उन्होंने हस्तशिल्प उत्पादों की आकर्षक प्रस्तुति की सराहना की और कहा कि ऐसे आयोजनों से न सिर्फ कारीगरों को बाजार मिलता है, बल्कि आमजन को भी भारत की समृद्ध कला और संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिलता है।
कलेक्टर कन्याल ने आईएएनएस से कहा, "गुना में करीब 50 स्टॉल लगे हुए हैं। अलग-अलग राज्यों से लोग यहां आए हैं। मध्य प्रदेश के भी कई कलाकार अलग-अलग जिलों से आए हैं। मैं गुनावासियों से आग्रह करता हूं कि अधिक संख्या में आकर इन कारीगरों के काम देखें, सराहें और पसंद आए तो खरीदारी भी करें।"
इस प्रदर्शनी ने कई हस्तशिल्पियों की जिंदगी बदलने की कहानी भी बयां की। गुजरात से आए और वर्तमान में ग्वालियर में रह रहे हस्तशिल्पी मोनू गुजराती ने कहा, "इस प्लेटफॉर्म के लिए मैं प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद करता हूं। पहले मेरी स्थिति अच्छी नहीं थी, लेकिन इस मंच के मिलने के बाद मेरी हालत सुधर गई है।"
उत्तर प्रदेश के बनारस से आए जलालुद्दीन अंसारी ने बताया कि वे बनारसी साड़ी, सूट और ड्रेस मटेरियल बनाते हैं। उन्होंने कहा, "अब ग्राहक तक सीधी पहुंच बन रही है, बीच का मार्जिन बच रहा है। पहले हमें सामान लेकर बाजार जाना पड़ता था, अब सीधे ग्राहक को बेच पा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी बनारस के सांसद हैं, उनके प्रयासों से हमें ‘वोकल फॉर लोकल’ का बेहतरीन प्लेटफॉर्म मिला है।"
राजस्थान के जयपुर से आए हस्तशिल्पी नीरज कुमार सैनी ने कहा कि इस प्लेटफॉर्म से उनकी आमदनी बढ़ी है। वहीं, नागपुर (महाराष्ट्र) की हस्तशिल्पी शकुन ठाकुर ने बताया कि उन्होंने अपना काम सिर्फ 7 हजार रुपए से शुरू किया था, जो आज 4 लाख रुपए तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से मिलने वाले लोन से कच्चा माल खरीदने में काफी मदद मिलती है।
पश्चिम बंगाल से आए बप्पा दास और सेवोसी दे ने भी सरकार के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि पहले गांव-गांव जाकर सामान बेचना मुश्किल होता था, लेकिन अब इस मंच के जरिए सीधे बाजार मिल गया है और आमदनी में बढ़ोतरी हुई है।
प्रदर्शनी में खरीदारी करने आए गुना के स्थानीय लोगों ने भी आयोजन की जमकर तारीफ की। महेंद्र नायक ने कहा कि हाथों की कलाकारी आम जनता तक पहुंचनी चाहिए। गायत्री शर्मा ने कहा कि 'वोकल फॉर लोकल' से हस्तशिल्पियों को रोजगार मिला है और ग्राहकों को अच्छे उत्पाद। बिप्लब जैन ने कहा कि यह सरकार का बहुत अच्छा प्रयास है, जिससे लोगों को अपने ही देश में काम करने का अवसर मिल रहा है।
उपायुक्त सहकारिता मुकेश जैन ने आमजन से अपील की कि यह प्रदर्शनी 16 फरवरी तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक प्रताप छात्रावास, मेन रोड, गुना में आयोजित रहेगी। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोग आकर इस प्रदर्शनी का लाभ उठाएं और देश की पारंपरिक कला को प्रोत्साहित करें।