लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर कांग्रेस का रुख साफ: घोषणा तभी होगी जब पूरी होगी संवैधानिक प्रक्रिया

लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर कांग्रेस का रुख साफ, कहा- औपचारिक ऐलान के बाद ही होगी घोषणा


नई दिल्ली, 10 फरवरी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ संभावित अविश्वास प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस ने मंगलवार को अपना रुख साफ किया। पार्टी ने कहा कि यदि ऐसा कोई कदम उठाया जाता है तो उसे पूरी तरह संवैधानिक तरीके से और औपचारिक रूप से सार्वजनिक किया जाएगा। कांग्रेस ने साफ किया कि जब तक अविश्वास प्रस्ताव को विधिवत पेश नहीं किया जाता, तब तक अटकलों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जाएगी।

इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया संविधान में स्पष्ट रूप से तय है। जैसे ही संविधान के तहत अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जाएगा, हम उसे सार्वजनिक रूप से घोषित करेंगे। जब तक औपचारिक घोषणा नहीं होती, मैं किसी भी तरह की अटकलों या अपेक्षाओं पर टिप्पणी नहीं कर सकता।

हालांकि, सूत्रों के अनुसार कांग्रेस जल्द ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा के महासचिव को सौंप सकती है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब संसद के मौजूदा सत्र के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। बार-बार हंगामे, तीखी बहसें और कार्यवाही में रुकावटें इस सत्र की पहचान बन गई हैं।

इंडिया ब्लॉक से जुड़े विपक्षी दल इस कदम पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा अध्यक्ष ने पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है और राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की बहस के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने का अवसर नहीं दिया गया। विपक्ष का कहना है कि इससे संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचा है।

कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि विपक्ष की आपत्ति किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि न्याय और संविधान के पालन से जुड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया, "मैंने साफ कहा है कि यह सुरक्षा का मुद्दा नहीं है। डर राहुल गांधी के बयानों से है। उन्हें बोलने नहीं देने की मंशा साफ दिखाई देती है।"

उन्होंने आगे कहा, "यदि अविश्वास प्रस्ताव की बात की जा रही है, तो वह किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। हम सिर्फ निष्पक्षता और निष्कलंकता चाहते हैं। अध्यक्ष का पद संवैधानिक है, और उसे सरकार के इशारों पर नहीं, बल्कि संविधान के अनुसार काम करना चाहिए।"

विपक्षी नेताओं के मुताबिक, प्रस्ताव लाने की वजहों में आठ विपक्षी सांसदों का निलंबन, पूर्व प्रधानमंत्रियों पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे पर कार्रवाई न होना, और महिला कांग्रेस सांसदों पर लगाए गए बिना सबूत के आरोप भी शामिल हैं।
 

Latest Replies

Trending Content

Forum statistics

Threads
15,149
Messages
15,186
Members
20
Latest member
7519202689
Back
Top