सोल, 10 फरवरी। दक्षिण कोरिया के वित्तीय नियामकों ने स्थानीय क्रिप्टो एक्सचेंज बिथंब के खिलाफ औपचारिक जांच शुरू कर दी है। यह जांच इस बात को लेकर की जा रही है कि बिथंब ने गलती से 60 ट्रिलियन वॉन यानी लगभग 41.2 अरब डॉलर मूल्य के बिटकॉइन कैसे बांट दिए, जबकि उसके पास इतने बिटकॉइन मौजूद ही नहीं थे। उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यह मामला बेहद गंभीर माना जा रहा है।
योनहाप न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, नियामकों ने सोमवार को बिथंब को जांच की जानकारी दी। इससे तीन दिन पहले अधिकारियों ने एक्सचेंज के दफ्तर में जाकर जांच की थी।
वित्तीय पर्यवेक्षण सेवा (एफएसएस) के एक अधिकारी ने कहा कि इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया जा रहा है और बाजार की व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी काम के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह गलती शुक्रवार को हुई, जब बिथंब ने एक प्रमोशनल इवेंट के दौरान 620,000 वॉन भेजने की बजाय गलती से 620,000 बिटकॉइन 249 ग्राहकों के खातों में भेज दिए। इस घटना के बाद एक्सचेंज पर बिटकॉइन की भारी बिकवाली शुरू हो गई, जिससे बाजार में हलचल मच गई।
बिथंब ने अपने बयान में कहा कि गलती का पता चलते ही ज्यादातर गलत तरीके से भेजे गए बिटकॉइन तुरंत वापस ले लिए गए। हालांकि, तब तक 1,788 बिटकॉइन पहले ही बेचे जा चुके थे, जिन्हें वापस नहीं लिया जा सका।
बिथंब जैसे केंद्रीकृत क्रिप्टो एक्सचेंज एक विशेष कंप्यूटर सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं, जिसे बुक-एंट्री ट्रेडिंग सिस्टम कहा जाता है। इस सिस्टम में लेन-देन की जानकारी एक्सचेंज के अपने रिकॉर्ड में रखी जाती है, न कि हर लेन-देन को सार्वजनिक ब्लॉकचेन पर दर्ज किया जाता है। अगर इस सिस्टम को सही तरीके से संभाला न जाए, तो असली बिटकॉइन और रिकॉर्ड में दिख रहे बिटकॉइन में अंतर आ सकता है, जिसे फैंटम बैलेंस कहा जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर के अंत तक बिथंब के पास लगभग 42,000 बिटकॉइन थे, जिनमें से सिर्फ 175 बिटकॉइन को छोड़कर बाकी सभी ग्राहकों के थे। यानी एक्सचेंज खुद बहुत कम बिटकॉइन रखता था।
यह जांच ऐसे समय में हो रही है जब देश की संसद में वर्चुअल एसेट्स से जुड़े नए कानूनों पर चर्चा चल रही है। इस बीच, देश की वित्तीय निगरानी संस्था ने कहा है कि वह आईटी सिस्टम से जुड़ी गड़बड़ियों के मामलों में वित्तीय कंपनियों पर सख्त जुर्माने और कड़े नियम लागू करेगी।
वित्तीय पर्यवेक्षण सेवा ने यह भी बताया कि भविष्य में इस तरह की तकनीकी गलतियों को रोकने के लिए नए नियम बनाए जाएंगे। इन नियमों के तहत आईटी सुरक्षा को मजबूत किया जाएगा और उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।