दिलीप घोष का हमला: फर्जी वोट बचाने एसआईआर में ममता सरकार ने चुनाव आयोग से किया किनारा

एसआईआर को लेकर ममता सरकार ने कभी सहयोग नहीं किया: दिलीप घोष


कोलकाता, 9 फरवरी। सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल के एसआईआर को लेकर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अंतिम मतदाता सूची प्रकाशन की समय-सीमा एक सप्ताह तक बढ़ा दी है। भाजपा नेता दिलीप घोष ने कहा कि एसआईआर को लेकर ममता बनर्जी की सरकार ने कभी चुनाव आयोग का सहयोग नहीं किया।

कोलकाता में मीडिया से बातचीत के दौरान भाजपा नेता दिलीप घोष ने कहा कि बंगाल की जनता सचेत है और उसने समय-सीमा से पहले ही फॉर्म भरकर जमा कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली। लेकिन टीएमसी सरकार को डर है कि यदि फर्जी मतदाताओं (जिनके वोट के आधार पर वे सत्ता में आते रहे हैं) की वोटर लिस्ट से कटौती कर दी गई तो उनकी सत्ता का क्या होगा। इसी कारण बंगाल में एसआईआर शुरू होने से पहले ही टीएमसी की ओर से धमकियां देना शुरू कर दिया गया। सरकार ने एसआईआर प्रक्रिया में सहयोग करने से इनकार कर दिया। पुलिस विभाग की ओर से कोई सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई। एसआईआर में लगे कर्मचारी, चाहे बीएलओ हों या अन्य सरकारी कर्मचारी दबाव के कारण पूरे सिस्टम को जानबूझकर विलंबित करते रहे और स्थिति को यहां तक ले आए।

भाजपा नेता ने कहा कि लोगों को परेशान करने के उद्देश्य से नोटिस जारी किए गए ताकि एसआईआर समय पर पूरा न हो पाए और फर्जी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बने रहें।

उन्होंने कहा कि एसआईआर बिना किसी दबाव के पूरा होगा और बंगाल की जनता निश्चिंत होकर विधानसभा चुनाव में वोट डालेगी।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में दस्तावेजों की पड़ताल और फाइनल वोटर लिस्ट की समयसीमा को 1 हफ्ते बढ़ाया है। पहले फाइनल वोटर लिस्ट जारी करने की डेडलाइन 14 फरवरी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार सुनिश्चित करें कि उसकी ओर से उपलब्ध कराए गए 8505 ग्रुप बी के अधिकारी कल शाम 5 बजे तक निर्वाचन अधिकारी (निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी) को रिपोर्ट करें। ईसीआई चाहे तो अपने अधिकारियों की जगह इन अधिकारियों की सेवा ले सकता है।
 

Similar threads

Forum statistics

Threads
5,403
Messages
5,435
Members
18
Latest member
neodermatologist
Back
Top