तिरुवनंतपुरम, 9 फरवरी। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने सोमवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर मुसलमानों के खिलाफ खुले तौर पर नफरत और हिंसा को बढ़ावा देने तथा भारत के संवैधानिक मूल्यों को कमजोर करने का आरोप लगाया।
फेसबुक पर एक कड़े शब्दों वाले पोस्ट में मुख्यमंत्री विजयन ने कहा कि एक ऐसे वीडियो का प्रसार, जो कथित तौर पर मुसलमानों के खिलाफ हिंसा के लिए उकसाता है, ने धर्मनिरपेक्ष समाज को गहराई से झकझोर दिया है और भाजपा की खतरनाक राजनीतिक दिशा को उजागर किया है।
विजयन के अनुसार, असम भाजपा के आधिकारिक हैंडल से साझा किए गए वीडियो में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को इस तरह दिखाया गया है, जो मुसलमानों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से हिंसा का आह्वान करने जैसा प्रतीत होता है।
उन्होंने कहा कि यह कृत्य अभूतपूर्व और बेहद चिंताजनक है, खासकर इसलिए क्योंकि इसमें एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की भूमिका सामने आती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह की हरकतें भारत की धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद पर सीधा प्रहार करती हैं।
विजयन ने यह भी कहा कि सरमा द्वारा बार-बार दिए गए कथित नफरत भरे भाषण और असम के ‘मिया’ मुस्लिम समुदाय को लेकर की गई अपमानजनक टिप्पणियां कोई अलग-थलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि यह भाजपा की “अमानवीय विभाजनकारी राजनीति” का हिस्सा हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि असम में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही बहुसंख्यक वोटों को एकजुट करने के लिए जानबूझकर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को हवा दी जा रही है, भले ही इसके लिए संवैधानिक मूल्यों को चुनौती क्यों न देनी पड़े।
एक सवाल उठाते हुए विजयन ने पूछा कि जो व्यक्ति कथित तौर पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ नरसंहार जैसे बयान देता हो, उसे एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य में किसी राज्य का शासन सौंपा जाना कैसे उचित ठहराया जा सकता है।
उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि यह मौन सहमति का संकेत देता है।
विजयन के अनुसार, सरमा ने केवल वही बातें खुलकर कही हैं, जिन्हें भाजपा और उसका वैचारिक संगठन आरएसएस सार्वजनिक रूप से कहने से हिचकते हैं।
पोस्ट में सरमा के राजनीतिक अतीत का भी जिक्र किया गया, जिसमें कहा गया कि वह कभी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और असम सरकार में प्रभावशाली मंत्री हुआ करते थे, लेकिन 2015 में भाजपा में शामिल हो गए।
विजयन ने आरोप लगाया कि इसके बाद से ही सरमा पूर्वोत्तर में भाजपा की सांप्रदायिक रणनीति के प्रमुख सूत्रधार के रूप में उभरे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुसलमान अल्पसंख्यकों को हाशिए पर डालने वाले बयानों के बावजूद सरमा के खिलाफ किसी भी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई न होना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि ये विचार कोई अपवाद नहीं, बल्कि भाजपा की मूल सोच को दर्शाते हैं।