रूसी तेल कटौती अटकलों पर विदेश सचिव का दो टूक जवाब: ऊर्जा आयात सिर्फ राष्ट्रीय हित में

भारत के ऊर्जा आयात फैसले राष्ट्रीय हित से संचालित: केंद्र


नई दिल्ली, 9 फरवरी। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सोमवार को कहा कि भारत के ऊर्जा स्रोतों से जुड़े फैसले पूरी तरह राष्ट्रीय हित के आधार पर किए जाते हैं, जिनमें विविधीकरण और प्रतिस्पर्धी कीमतों पर विशेष जोर दिया जाता है। उनका यह बयान उन रिपोर्टों के जवाब में आया है, जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा के बाद भारत रूसी तेल आयात में कटौती कर सकता है।

रूसी कच्चे तेल को लेकर पूछे गए सवालों पर विदेश सचिव ने कहा कि एक विकासशील अर्थव्यवस्था और ऊर्जा का बड़ा आयातक होने के नाते भारत के लिए स्थिर और किफायती ऊर्जा आपूर्ति को प्राथमिकता देना अनिवार्य है।

उन्होंने कहा कि भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना “सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता” है। मिस्री ने बताया कि भारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का 80 से 85 प्रतिशत आयात करता है और इतनी अधिक निर्भरता महंगाई को भी प्रभावित कर सकती है।

विदेश सचिव ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि “उपभोक्ताओं को सही कीमत पर, पर्याप्त मात्रा में और भरोसेमंद व सुरक्षित माध्यमों से ऊर्जा उपलब्ध हो।” उन्होंने कहा कि ऊर्जा आयात नीति पूरी तरह इन्हीं उद्देश्यों से संचालित होती है।

मिस्री ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में मौजूद अनिश्चितताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत मूल्य स्थिरता बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा, “भारत न केवल दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में से एक है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों में एक स्थिरकारी कारक के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।”

उन्होंने दोहराया कि भारत की ऊर्जा नीति के प्रमुख आधार पर्याप्त उपलब्धता, उचित मूल्य और आपूर्ति की विश्वसनीयता हैं।

विदेश सचिव ने यह भी बताया कि ऊर्जा आयात से जुड़े फैसले सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्रों की तेल कंपनियां करती हैं और ये निर्णय मौजूदा बाजार परिस्थितियों के अनुसार लिए जाते हैं।

मिस्री ने कहा, “मैं पूरी दृढ़ता और विश्वास के साथ कह सकता हूं कि चाहे सरकार हो या हमारे कारोबारी संस्थान, सभी निर्णय राष्ट्रीय हितों से ही निर्देशित होते हैं।”

इस बीच, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा को बताया कि वैश्विक आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा की स्थिति में भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार 74 दिनों तक की जरूरतें पूरी करने में सक्षम हैं। इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व्स लिमिटेड (आईएसपीआरएल) के पास फिलहाल लगभग 40.94 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल संग्रहित है, जो कुल भंडारण क्षमता का करीब 77 प्रतिशत है।

पुरी ने यह भी बताया कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता और चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है। देश की रिफाइनिंग क्षमता 260 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से बढ़कर 320 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष हो गई है।
 

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