10 फरवरी 2005: जब उत्तर कोरिया ने दहाड़ कर कहा- 'हम परमाणु शक्ति हैं' और बदल दी दुनिया की तस्वीर

North Korea on Nuclear programme


नई दिल्ली, 9 फरवरी। एक छोटा सा देश लेकिन हठ ऐसी है कि दुनिया के बड़े-बड़े कुछ कहने-सुनने से पहले सोचते विचारते हैं। इस देश का नाम है डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (डीपीआरके) और जिसे हम उत्तर कोरिया के नाम से जानते हैं। 10 फरवरी 2005 को इस देश ने पहली बार आधिकारिक रूप से यह स्वीकार किया कि इसके पास परमाणु हथियार हैं।

यह घोषणा प्योंगयांग की सरकारी समाचार एजेंसी के माध्यम से सामने आई और तत्काल ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई। शीत युद्ध के बाद के दौर में यह बयान वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था, क्योंकि इससे परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) और कूटनीतिक प्रयासों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।

उत्तर कोरिया की यह स्वीकारोक्ति ऐसे समय में आई जब वह अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनावपूर्ण वार्ताओं में उलझा हुआ था। छह-पक्षीय वार्ता, जिसमें अमेरिका, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, रूस और उत्तर कोरिया शामिल थे, का उद्देश्य कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त करना था। लेकिन 2005 की इस घोषणा ने साफ कर दिया कि उत्तर कोरिया अब केवल परमाणु तकनीक पर काम करने का संकेत नहीं दे रहा, बल्कि स्वयं को एक परमाणु संपन्न राष्ट्र के रूप में पेश कर रहा है।

अमेरिका ने इस बयान को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सीधी चुनौती माना। वाशिंगटन का तर्क था कि उत्तर कोरिया का परमाणु हथियार रखना न केवल क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ाएगा, बल्कि अन्य देशों को भी परमाणु हथियार विकसित करने के लिए प्रेरित करेगा। जापान और दक्षिण कोरिया में भी इस घोषणा के बाद सुरक्षा चिंताएं तेज हो गईं, क्योंकि दोनों देश उत्तर कोरिया की मिसाइल क्षमता की जद में आते हैं।

चीन, जिसे उत्तर कोरिया का पारंपरिक सहयोगी माना जाता है, इस घोषणा के बाद असहज स्थिति में दिखा। बीजिंग ने संयम और वार्ता पर जोर दिया, क्योंकि उसे आशंका थी कि कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव बढ़ने से क्षेत्रीय स्थिरता और उसकी आर्थिक व कूटनीतिक प्राथमिकताएं प्रभावित होंगी। रूस ने भी परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने की आवश्यकता पर बल दिया, लेकिन साथ ही सैन्य टकराव से बचने की सलाह दी।

इस घोषणा का एक महत्वपूर्ण पहलू उत्तर कोरिया की आंतरिक राजनीति से भी जुड़ा था। किम जोंग-इल के नेतृत्व में शासन ने परमाणु हथियारों को राष्ट्रीय सुरक्षा की गारंटी और विदेशी दबावों के विरुद्ध एक रणनीतिक ढाल के रूप में प्रस्तुत किया। इससे देश के भीतर सत्ता की पकड़ मजबूत करने और बाहरी दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश की गई कि उत्तर कोरिया को सैन्य रूप से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

10 फरवरी 2005 का यह बयान आने वाले वर्षों की घटनाओं का संकेत भी था। इसके बाद उत्तर कोरिया ने कई परमाणु परीक्षण किए और अपनी मिसाइल तकनीक को और विकसित किया।
 

Forum statistics

Threads
15,824
Messages
15,861
Members
20
Latest member
7519202689
Back
Top