इंडियन बाइसन 'गौर': विशालकाय शरीर, गजब की ताकत और शाकाहारी होकर भी जंगल का निर्भीक और मजबूत सिपाही

विशाल शरीर और गजब की ताकत, जंगल का मजबूत सिपाही है 'इंडियन बाइसन'


नई दिल्ली, 9 फरवरी। भारत के जंगलों में ऐसे कई जीव-जंतु हैं, जो अपनी खास विशेषता की वजह से जाने जाते हैं। जंगलों में रहने वाले विशालकाय और शक्तिशाली वन्यजीवों में से एक है गौर, जिसे इंडियन बाइसन के नाम से भी जाना जाता है। इसे जंगल का मजबूत सिपाही या पारिस्थितिक तंत्र का रक्षक भी कहा जाता है।

गौर का वैज्ञानिक नाम बोस गौरस है। यह जानवर अपने भारी-भरकम और मजबूत कठ काठी, गहरे भूरे से काले रंग और मजबूत कद-काठी के लिए प्रसिद्ध है। इसके पैरों के खुर पर सफेद मोजे जैसे निशान इसकी खास पहचान हैं। गौर स्वभाव से काफी शर्मीला होता है, लेकिन इसकी ताकत इतनी जबरदस्त होती है कि जंगल के बड़े शिकारी जैसे बाघ या शेर भी अकेले इसका सामना करने से हिचकिचाते हैं।

खास बात है कि यह शक्तिशाली जानवर पूरी तरह से शाकाहारी होता है और मुख्य रूप से घास, बांस की पत्तियों के साथ अन्य वनस्पतियां खाता है।

इंडियन बाइसन बिहार का राजकीय पशु है, जिसकी बिहार में सबसे बड़ी आबादी वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पाई जाती है। यहां बेहतर घास के मैदान, प्रभावी संरक्षण प्रयासों और नियमित रखरखाव के कारण गौर की संख्या में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई है। यह वृद्धि न केवल इस क्षेत्र के लिए बल्कि पूरे पारिस्थितिक तंत्र के लिए सकारात्मक संकेत है, क्योंकि गौर जंगल का मजबूत सिपाही माना जाता है।

एक वयस्क नर गौर बहुत विशाल होता है। इसका वजन 600 से 1,000 किलोग्राम या उससे भी ज्यादा हो सकता है। कंधे तक की ऊंचाई लगभग 2 मीटर तक पहुंचती है। इस मजबूत कद-काठी के कारण यह जंगल का सबसे ताकतवर जानवर माना जाता है।

भारत में गौर मुख्य रूप से पश्चिमी घाट, मध्य भारत और उत्तर-पूर्व के घने जंगलों में पाया जाता है। नागरहोल, मुदुमलाई और बांदीपुर जैसे क्षेत्र इसके लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा, यह दक्षिण, दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों जैसे चीन, थाईलैंड, मलेशिया, बांग्लादेश, भूटान और नेपाल के पहाड़ी जंगलों और घास वाले इलाकों में भी पाया जाता है।

संरक्षण की दृष्टि से गौर को कई स्तरों पर सुरक्षा मिली हुई है। अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की रेड लिस्ट में इसे 1986 से सुभेद्य केटेगरी में रखा गया है। भारत सरकार ने इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची में शामिल किया है, जो उन्हें सुरक्षा देती है। साथ ही यह लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय की परिशिष्ट-I में भी सूचीबद्ध है, जिससे इसका व्यापार पूरी तरह प्रतिबंधित है।

रोचक बात यह है कि गौर गोवा और बिहार का राज्य पशु है। पालतू रूप में गौर को 'गायल' या 'मिथुन' कहा जाता है। गौर की मौजूदगी जंगलों की सेहत का संकेत देती है। यह पारिस्थितिक संतुलन भी मजबूत बनाता है।
 
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