नई दिल्ली, 9 फरवरी। मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने सोमवार को बताया कि उसने साल 2025 में रेलवे के जरिए 5.85 लाख से ज्यादा वाहनों की डिलीवरी की है, जो साल 2024 के मुकाबले 18 प्रतिशत ज्यादा है। कंपनी ने इसे ग्रीन लॉजिस्टिक्स की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया है।
मारुति सुजुकी के अनुसार, वाहनों को भेजने में रेलवे की हिस्सेदारी 2016 में 5.1 प्रतिशत थी, जो 2025 में बढ़कर 26 प्रतिशत हो गई है। इससे कार्बन उत्सर्जन कम हुआ, देश के तेल आयात में कमी आई और सड़कों पर ट्रैफिक भी घटा है।
मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ हिसाशी ताकेउची ने कहा कि साल 2025 में कंपनी ने रेल द्वारा वाहनों की अब तक की सबसे ज्यादा डिलीवरी की, जिसमें 5.85 लाख से ज्यादा यूनिट्स शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि इस साल ग्रीन लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने के लिए दो बड़ी उपलब्धियां हासिल की गईं। पहली, मानेसर प्लांट में भारत का सबसे बड़ा इन-प्लांट ऑटोमोबाइल रेलवे साइडिंग शुरू किया गया। दूसरी, चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे आर्च ब्रिज के जरिए कश्मीर घाटी तक रेल से वाहनों की डिलीवरी की गई, जो किसी भी ऑटो कंपनी के लिए पहली बार हुआ।
उन्होंने आगे कहा कि कंपनी का मध्यम अवधि का लक्ष्य वित्त वर्ष 2030-31 तक रेलवे के जरिए गाड़ियों की ढुलाई को 35 प्रतिशत तक बढ़ाना है। इससे भारत के 2070 तक नेट-जीरो कार्बन लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलेगी।
वित्त वर्ष 2014-15 से अब तक मारुति सुजुकी ने हब एंड स्पोक मॉडल के माध्यम से 22 स्थानों से देश भर के 600 से ज्यादा शहरों में 28 लाख से ज्यादा यूनिट्स रेलवे के जरिए भेजी हैं।
फिलहाल, मारुति सुजुकी 45 से ज्यादा फ्लेक्सी डेक रेक का उपयोग करती है, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता प्रति ट्रिप करीब 260 वाहनों को ले जाने की है।
साल 2025 में गुजरात और मानेसर स्थित मारुति सुजुकी के इन-प्लांट रेलवे साइडिंग से कुल रेल डिलीवरी का 53 प्रतिशत हिस्सा भेजा गया।
मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने 'सर्कुलर मोबिलिटी' नाम से एक खास रणनीति अपनाई है, जिसका लक्ष्य गाड़ियों के पूरे जीवन चक्र-डिजाइन, निर्माण, लॉजिस्टिक्स और पुरानी गाड़ियों के निपटान (ईएलवी) तक-में कार्बन उत्सर्जन को कम करना है।
कंपनी रेलवे को वाहनों की ढुलाई का सुरक्षित, सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल साधन बनाने में आगे रही है।
हिसाशी ताकेउची ने कहा कि मारुति सुजुकी पूरे वाहन जीवन चक्र में कार्बन फुटप्रिंट कम करने के लिए लगातार काम कर रही है।