ओटावा, 8 फरवरी। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल ने कनाडा के साथ द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए इस सप्ताह ओटावा में उच्च स्तरीय वार्ता की। यह वार्ता दोनों देशों के संबंधों को फिर से मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा है।
शनिवार को डोवाल ने कनाडा के प्रधानमंत्री की उप सचिव और राष्ट्रीय सुरक्षा एवं खुफिया सलाहकार नताली जी. ड्रौइन से मुलाकात की। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह बैठक दोनों देशों के बीच नियमित द्विपक्षीय सुरक्षा वार्ता का हिस्सा थी।
दोनों पक्षों ने अपने राष्ट्रों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए चल रही पहलों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून प्रवर्तन मामलों पर भविष्य के सहयोग को निर्देशित करने के लिए एक साझा कार्य योजना पर सहमति व्यक्त की। इस कदम से साझा प्राथमिकताओं पर अधिक व्यावहारिक संयुक्त प्रयासों का मार्ग प्रशस्त हुआ।
चर्चाओं का एक अहम निर्णय दोनों देशों में सुरक्षा और कानून प्रवर्तन संपर्क अधिकारियों की नियुक्ति के लिए प्रतिबद्धता थी। इस कदम का उद्देश्य संचार चैनलों को बेहतर बनाना और नशीली दवाओं की अवैध तस्करी, विशेष रूप से फेंटानिल प्रीकर्सर और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध नेटवर्क की गतिविधियों सहित साझा खतरों पर जानकारी का तेजी से आदान-प्रदान करना है।
दोनों अधिकारियों ने साइबर सुरक्षा में सहयोग को औपचारिक रूप देने का भी संकल्प लिया, जिसमें नीतिगत समन्वय और साइबर खतरों पर सूचनाओं का आदान-प्रदान शामिल है। उन्होंने प्रत्येक देश के घरेलू कानूनों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का सम्मान करते हुए, धोखाधड़ी की रोकथाम और आव्रजन प्रवर्तन से संबंधित संयुक्त कार्यों पर बातचीत को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
इस यात्रा से संबंधों में अतीत में आए तनाव के बावजूद व्यावहारिक सुरक्षा संबंधों को और मजबूत करने में दोनों देशों की आपसी रुचि स्पष्ट हुई।
दो दिवसीय यात्रा के अंतर्गत, डोवाल ने शुक्रवार (6 फरवरी) को कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री से भी मुलाकात की। ये मुलाकातें भारत-कनाडा सुरक्षा संबंधों में सकारात्मक गति का संकेत देती हैं, जिनमें मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध जैसी सीमा पार चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
दोनों पक्षों के अधिकारियों ने इन मुलाकातों को दोनों देशों में सार्वजनिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों पर विश्वास बढ़ाने और प्रभावी सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।