हैदराबाद, 8 फरवरी। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने रविवार को आरोप लगाया कि अपने शासनकाल के दौरान भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने फोन टैपिंग के जरिए लोगों को ब्लैकमेल किया और अवैध तरीके से सैकड़ों करोड़ रुपये की लूट की।
मुलुगु जिले में नगर निकाय चुनावों को लेकर कांग्रेस पार्टी की जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने बीआरएस को “ब्लैकमेल राजकीय समिति” करार दिया। उन्होंने दावा किया कि फोन टैपिंग के जरिए लोगों को डराया-धमकाया गया और बीआरएस के पार्टी खाते में करीब 1,500 करोड़ रुपये अनैतिक तरीकों से जमा किए गए।
मुख्यमंत्री ने बीआरएस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) पर 10 वर्षों के शासन में सत्ता का दुरुपयोग कर अकूत संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया। उन्होंने भाजपा सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी का हवाला देते हुए कहा कि व्यवसायियों के फोन टैप किए गए और उन पर अपनी संपत्तियां ट्रांसफर करने का दबाव बनाया गया।
रेवंत रेड्डी ने कलेश्वरम और फॉर्मूला ई-रेस घोटालों में सीबीआई जांच के आदेश न देने को लेकर केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी से सवाल किया कि जांच की मांग पर वे चुप क्यों हैं। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा, “किशन रेड्डी अब किशन राव बन गए हैं और केसीआर के दत्तक पुत्र की तरह व्यवहार कर रहे हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ सीबीआई और ईडी के मामले दर्ज कर सकती है, लेकिन कलेश्वरम घोटाले में जांच के आदेश देने से बच रही है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि किशन रेड्डी, केसीआर, केटीआर और हरीश राव को बचाने के लिए उनके साथ मजबूत संबंध बनाए हुए हैं।
रेवंत रेड्डी ने कहा कि बीआरएस नेताओं ने फोन टैपिंग के मामले में किसी को नहीं बख्शा- चाहे वे विपक्षी नेता हों, पत्रकार, जज या फिल्मी सितारे। यहां तक कि पति-पत्नी की निजी बातचीत भी सुनी गई।
मुख्यमंत्री ने जनता से अपील की कि वे बीआरएस और भाजपा को वोट न दें, क्योंकि दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और कांग्रेस को हराने के लिए आपस में मिले हुए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि केसीआर परिवार ने हजारों करोड़ रुपये के टीवी चैनल, अखबार और व्यवसाय खड़े किए, लेकिन गरीबों को डबल बेडरूम मकान नहीं मिले। उन्होंने कहा, “अगर केसीआर हर साल दो लाख घर बनवाते, तो 10 साल में 20 लाख घर बन सकते थे।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार हर विधानसभा क्षेत्र में 3,500 इंदिरम्मा घरों का निर्माण करवा रही है। कुल 22,500 करोड़ रुपये की लागत से 4.5 लाख घर बनाए जा रहे हैं और आगामी बजट में इंदिरम्मा आवास योजना के दूसरे चरण को मंजूरी दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने नगरपालिकाओं और नगर निगमों के लिए 17,442 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। पूर्ववर्ती वारंगल जिले की नगरपालिकाओं के लिए 6,116 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिनमें अकेले भूपालपल्ली नगरपालिका के लिए 92 करोड़ रुपये शामिल हैं।
जिलों के पुनर्गठन को लेकर बीआरएस पर झूठा प्रचार फैलाने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “यह अफवाह फैलाई जा रही है कि भूपालपल्ली जिला खत्म किया जाएगा। सरकार किसी भी जिले को समाप्त करने या नया जिला बनाने पर विचार नहीं कर रही है। सभी की राय लेने और विधानसभा में चर्चा के बाद ही जिलों के पुनर्गठन पर फैसला लिया जाएगा।”